ईरान में 'अहमदीनेजाद राष्ट्रपति चुनाव जीते'

ईरान के चुनाव आयोग ने वर्तमान राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को दोबारा विजयी घोषित किया. पर सुधारवादी नेता मीर हुसैन मुसावी ने धांधलियों के आरोप लगाए.
आयोग ने बताया है कि उन्हें दो तिहाई बहुमत मिला है जबकि प्रमुख प्रतिद्वंद्वी मीर हुसैन मुसावी को 30 प्रतिशत वोट मिले हैं.
अभी तक दो तिहाई से भी ज़्यादा मतों की गिनती का काम किया जा चुका है और रुझानों को देखते हुए आयोग ने जीत की घोषणा कर दी है.
हालांकि जीत की घोषणा से उलट अहमदीनेजाद के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी और सुधारवादी नेता मीर हुसैन मुसावी ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया है.
कुछ देर पहले एक पत्रकारवार्ता में उन्होंने यह भी दावा किया कि धांधलियों के बावजूद वो ही चुनाव जीते हैं.
मीर हुसैन मुसावी का आरोप है कि शुक्रवार को मतदान के दौरान कई मतदान केंद्रों पर मतपत्रों की कमी थी जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग मतदान नहीं कर सके.
भारी मतदान
शुक्रवार को राष्ट्रपति पद के लिए जब मतदान का काम शुरू हुआ तो उम्मीद के मुताबिक भारी तादाद में लोग वोट देने के लिए बाहर निकले.
जानकारी के मुताबिक 70 प्रतिशत से भी ज़्यादा मतदाताओं ने इस चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया.
मतदान केंद्रों पर लोगों ने भारी संख्या के कारण मतदान का समय तीन घंटे के लिए बढ़ा दिया गया था.
वर्तमान राष्ट्रपति अहमदीनेजाद और सुधारवादी नेता मीर हुसैन मुसावी के बीच मुख्य मुक़ाबला है
राजधानी तेहरान में मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी-लंबी कतारें देखी गईं. बुज़ुर्ग और युवा, पुरुष और महिलाएँ, नौजवान लड़के और लड़कियाँ सभी ने जोश के साथ अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया.
इस चुनाव में कट्टरवादी माने जाने वाले वर्तमान राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद और सुधारवादी नेता मीर हुसैन मुसावी के बीच मुख्य मुक़ाबला रहा.
ईरान की उलेमा काउंसिल ने चुनाव में चार लोगों के नाम को अंतिम सहमति दी थी. बाक़ी के दो नाम मोहसिन रेज़ाई और मेहदी करूबी हैं.
ईरान में इस चुनाव पर दुनियाभर की नज़र अबतक टिकी हुई है. सबको ये उत्सुकता है कि ईरान में सत्ता का ऊंट किस करवट बैठेगा.
पश्चिमी देशों की ईरान के चुनाव में इसलिए भी दिलचस्पी बढ़ी क्योंकि उनका अनुभव अहमदीनेजाद के साथ अच्छा नहीं रहा है और नेतृत्व में बदलाव के बिना उन्हें ईरान के तेवरों में बदलाव की उम्मीद कम है.


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