जींस पर प्रतिबंध से छात्राएं नाराज़

College Girls on Jeans
लखनऊ। छेड़खानी की घटनाओं को रोकने के लिए छात्राओं के जींस पहनने पर रोक लगाने संबंधी उत्तर प्रदेश के कॉलेजों का तालिबानी फैसला यहां की छात्राओं को मंजूर नहीं है। कानपुर शहर में चार महाविद्यालयों ने कॉलेज परिसर में छात्राओं के जींस पहनने पर प्रतिबंध लगा दी है जिसे लेकर छात्राएं ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यकर्ताओं में भी रोष है।

छात्राओं का कहना है कि छेड़खानी की घटनाओं को जींस पर प्रतिबंध लगाने से रोका नहीं जा सकता। इससे अच्छा होता कि कॉलेज उन्हें मार्शल आर्ट का प्रशक्षिण देकर मनचलों से मुकाबला करने के लिए सक्षम बनाते। वहीं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस बात का विरोध करते हुए कहा है कि "कॉलेजों के इस फैसले से ऐसा लगता है कि मानो जींस पहनने वाली लड़कियां ही छेड़खानी का शिकार होती हैं।"

महिला कार्यकर्ता रुपरेखा वर्मा कहती हैं कि एक ओर हम समाज में लड़के और लड़कियों को बराबरी का हक देने की बात करते हैं और दूसरी ओर उनपर इस तरह के फैसले थोपते हैं। इससे समाज में लड़कियों के कमजोर होने का संदेश जाएगा। वहीं छात्राओं का भी कहना है कि जींस पहनने में कोई अश्लीलता नहीं है, बल्कि यह दैनिक उपयोग में सलवार की अपेक्षा ज्यादा आरामदायक होता है।

ज्ञात हो कि गत 9 जून को कानपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध शहर के दयानंद महिला महाविद्यालय, सेन बालिका महाविद्यालय, जौहरी महिला महाविद्यालय और आचार्य नरेंद्र देव महिला महाविद्यालय ने बढ़ती छेड़खानी की घटनाओं पर रोक लगाने के नाम पर एक संयुक्त बैठक के बाद छात्राओं के महाविद्यालय परिसर में जींस पहनने पर रोक लगाने का फैसला किया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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