ताज नगरी में 'आगरा बाजार' के लिए याद किए जाते हैं हबीब तनवीर

आगरा, 13 जून (आईएएनएस)। ताज नगरी आगरा के लोग मशहूर रंगगर्मी हबीब तनवीर को 'आगरा बाजार' नाटक के लिए याद करते हैं जिसका उन्होंने 50 वर्ष पहले पहली बार मंचन किया था।

शहर के रंगमंच प्रेमियों का कहना है कि 'आगरा बाजार' अतीत का एक सच्चा वृत्तांत है और दिवंगत हबीब तनवीर का एक स्मारक यहां बनना चाहिए। उल्लेखनीय है कि तनवीर का विगत आठ जून को भोपाल में 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया था।

'इंडियन पीपुल्स थियेटर एसोसिएशन' के राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्र रघुवंशी ने आईएएनएस से कहा,"आगरा में सिर्फ दो बार ही इस नाटक का मंचन हुआ है। परंतु यह एक अच्छा विचार होगा कि आगरा में एक सभागार में इस नाटक का रोजाना मंचन किया जाए क्योंकि यह हमारी संस्कृति की संपन्नता और विभिन्नता को मजबूती से रेखांकित करता है। यह पर्यटकों के लिए भी फायदेमंद रहेगा।"

'आगरा बाजार' न सिर्फ तनवीर की जिंदगी में मील का पत्थर का साबित हुआ बल्कि इसने भारतीय रंगमंच इतिहास में एक नया आयाम स्थापित कर दिया। साल 1954 में इस नाटक की पटकथा लिखी गई थी और इसका पहला मंचन किसी साभागर में नहीं बल्कि एक बाजार में हुआ था।

'ब्रज मंडल हेरिटेज कंजरवेशन सोसायटी' के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा कहते हैं, "यह कोई सामान्य नाटक नहीं है, लेकिन अतीत का सच्चा वृत्तांत है। यह एक वृतचित्र की तरह है जिसमें आगरा के उस समय जीवन को दर्शाया गया जब यह शहर राजनीति और संस्कृति का प्रमुख केंद्र हुआ करता था।"

संस्कृति समालोचक महेश धाकड़ वर्ष 2005 के 'मून महोत्सव' को याद करते हैं जिसमें इस नाटक का मंचन किया गया था। उन्होंने कहा, "हबीब तनवीर तीन दिनों तक आगरा में रहे और यहां के स्थानीय रंगमंच समूहों से बातचीत की। उनके इस नाटक के जरिए आगरा की संस्कृति और जीवन पूरी दुनिया में संपन्न रूप में फैला।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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