ईरान के राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवारों का सफ़र

इनमें मौजूदा राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के अलावा मीर हुसैन मुसावी, मोहसिन रेज़ाई और मेहदी करूबी शामिल हैं.
मतदान 12 जून को होना है. टीकाकारों की राय में मुख्य मुक़ाबला कट्टपंथी महमूद अहमदीनेजाद और सुधारवादी मीर हुसैन मुसावी के बीच है. यहाँ चारों उम्मीदवार के सियासी सफ़र पर एक नज़र डाली जा रही है.**************************************************************
महमूद अहमदीनेजाद महमूद अहमदीनेजाद ने वर्ष 2005 के राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज की थी
महमूद अहमदीनेजादवर्ष 2005 में ईरान के राष्ट्रपति चुनावों में कट्टरपंथी माने जाने वाले महमूद अहमदीनेजाद उम्मीदवार के रूप में खड़े हुए तो शायद ही किसी ने उनकी जीत की भविष्यवाणी की हो.
लेकिन चुनाव के दूसरे दौर में तेहारन के मेयर ने जीत का झंडा लहरा दिया और इस तरह वे ऐसे पहले राष्ट्रपति बन गए जो धर्म गुरु नहीं थे.
मृदुभाषी अहमदीनेजाद 1956 में मामूली लुहार परिवार में पैदा हुए और राष्ट्रपति बनने से पहले उनकी गिनती ग़रीबी, भ्रष्टाचार और देश में तेल की आमदनी के बंटवारे के लिए लड़ने वालों में होती थी.
पिछले कुछ सालों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी छवि अमरीका और इसराइल विरोधी के रुप में उभरी है. देश की परमाणु और मिसाइल नीति पर उनका कड़ा रुख़ जहाँ पश्चिम को परेशान करने वाला रहा वहीं देश में कइयों को ख़ुश करने वाला भी रहा.
अप्रैल 2009 में जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के नस्लभेद सम्मेलन में इसराइल को नस्लभेदी बताकर अहमदीनेजाद ने वहाँ ख़ासा हंगामा खड़ा कर दिया, लेकिन जब देश लौटे तो उनका स्वागत एक हीरो के रुप में हुआ.
हालाँकि अमरीका को अपना दुश्मन बताने और देश की आर्थिक समस्याओं का हल नहीं कर पाने के लिए उनकी आलोचना भी होती रही है.
इन सबके बाद भी उन्हें देश की फ़ौज, रिवोल्यूशनरी गार्ड और राज्य के नियंत्रण वाले मीडिया का समर्थन है और टीकाकारों की राय में ऐसे में उनको हराना दूर की कौड़ी है.
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मीर हुसैन मुसावी मीर हुसैन मुसावी वर्ष 1981 से 89 तक ईरान के प्रधानमंत्री पद पर आसीन रहे हैं
मीर हुसैन मुसावीईरान के पूर्व प्रधानमंत्री मीर हुसैन मुसावी राष्ट्रपित चुनावों में मौजूदा राष्ट्रपति के सबसे बड़े प्रतिद्वंदी माने जा रहे हैं.
ख़ुद को सुधारवादी मानने वाले मुसावी वर्ष 1981 से 89 तक ईरान के प्रधानमंत्री पद पर आसीन रहे हैं. उस दौरान उनकी चतुर आर्थिक नीति की सराहना भी हुई, क्योंकि वो दौर ईरान-इराक़ के टकराव का ज़माना था.
मुसावी प्रधानमंत्री का पद छोड़ने के बाद वर्ष 1989 से 2005 तक ईरान के राष्ट्रपति के सलाहकार रहे हैं.
मुसावी ने ईरान की ख़स्ताहाल अर्थव्यवस्था को चुनावी मुद्दा बनाकर अहमदीनेजाद की नीतियों कड़ी आलोचना की है.
उनके लिए सबसे अच्छी बात ये है कि उनका समर्थन ईरान के पूर्व सुधारवादी राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ातमी कर रहे हैं.
68 वर्षीय मुसावी ने देश में अधिक निजी स्वतंत्रता का आह्वान किया है और ग़ैर-सरकारी टेलीविज़न चैनलों के प्रतिबंध की आलोचना की है.
हालाँकि उन्होंने भी परमाणु कार्यक्रमों को बंद करने से इनकार किया है और कहा है कि उसका मक़सद शांति के लिए है.
मुसावी फ़ारसी, अरबी और अंग्रेज़ी के ज्ञानी हैं और फ़िलहाल ईरानी एकेडमी ऑफ़ आर्ट्स के अध्यक्ष हैं.
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मोहसिन रेज़ाई मोहसिन रेज़ाई 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' के पूर्व प्रमुख हैं
मोहसिन रेज़ाईमोहसिन रेज़ाई शक्तिशाली 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' के पूर्व प्रमुख हैं. 54 वर्षीय रेज़ाई की गिनती भी एक कट्टरपंथी उम्मीदवार के रुप में हो रही है.
उन्होंने वर्ष 2005 के राष्ट्रपति चुनावों में भी हिस्सा लिया था लेकिन मदतान से पहले चुनाव से हट गए थे.
ख़ुद को राष्ट्रपति अहमदीनेजाद का आलोचक बताने वाले रेज़ाई ने राष्ट्रपति पर आरोप लगाया है कि वे देश को गर्त में धकेल रहे हैं जबकि उन्होंने देश की ख़स्ताहाल अर्थव्यवस्था को सुधारने का वादा किया है.
अर्थशास्त्र में डॉक्ट्रेट रेज़ाई ग़रीबी, महंगाई और बेरोज़गारी से लड़ने की बात कह रहे हैं.
देश के परमाणु कार्यक्रम पर वो इस बात के लिए अहमदीनेजाद की आलोचना कर रहे हैं कि राष्ट्रपति ने ग़ैर-ज़िम्मेदाराना भाषा का प्रयोग किया है.
उनका कहना है कि वो परमाणु कार्यक्रम का समर्थन करते हैं लेकिन ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयान से बचने की आवश्यकता है.
रेज़ाई ने एक सैनिक के रूप में 1979 की क्रांति से पहले काम शुरू किया. वे 27 वर्ष की उम्र में 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' के कमांडर नियुक्त किए गए और ईरान-इराक़ ख़ूनी युद्ध के दौरान फ़ौज का नेतृत्व किया.
रेज़ाई उन पाँच ईरानी अधिकारियों में शामिल हैं जो वर्ष 1994 में अर्जेंटीना में इसराइली सेंटर पर हुए हमले में कथित रूप से शामिल थे. इस मामले में अर्जेंटीना को उनकी तलाश है.
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मेहदी करूबी मेहदी करूबी 1989 से 1992 तक ईरानी संसद के स्पीकर रहे हैं
मेहदी करूबीसुधारवादी करूबी वर्ष 1989 से 1992 तक ईरानी संसद के स्पीकर रहे हैं. ये वो दौर था जब ईरानी संसद में इस्लामी कट्टरपंथियों का प्रभुत्व था.
जब वर्ष 2002 में कुछ सुधारवादी नेताओं को जेल भेजा रहा था तो उन्होंने उसका खुलकर विरोध किया था और उनके इस क़दम की कुछ सांसदों ने सराहना की थी.
वे 2005 के चुनावों में उम्मीदवार थे और पहले दौर में तीसरे स्थान पर रहे थे. उन्होंने चुनावी प्रक्रिया की यह कहकर आलोचना की थी कि चुनाव में ज़रूरत से ज़्यादा दख़ल है और पैसे ने नतीजों को प्रभावित किया.
उन्होंने राष्ट्रपति के उस बयान की खुलकर निंदा की थी जिसमें अहमदीनेजाद ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यूरोप में यहूदियों के जनसंहार की बात को एक मिथक मात्र बताया था.
करूबी ने वादा किया है कि अगर वो राष्ट्रपति चुने जाते हैं तो दूसरे देशों से 'तनाव कम करने की नीति' को अपनाएंगे.
उन्होंने समाचार एजेंसी एएफ़पी को कहा है कि वो कट्टरपंथियों को बिना अलग-थलग किए ईरान की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सुधार के लिए बीच का रास्ता अपनाएंगे.
करूबी ने आग्रह किया है कि 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' को राष्ट्रपति चुनावों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और उनकी जीत या हार का फ़ैसला जनता के जनादेश के अनुसार होना चाहिए.


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