'कश्मीरियों की इच्छा का ध्यान रखा जाए'

भारत दौरे पर आए अमरीका के विदेश उप मंत्री विलियम बर्न्स ने कहा, "हमारा ये मानना रहा है कि कश्मीर मसले का हल कश्मीरी लोगों की इच्छा को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए."
भारत में इसे कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के रुख़ के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है. पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के प्रशासन के दौरान अमरीका की ओर से इस तरह का कोई बयान नहीं आया था.
पाकिस्तान के साथ वार्ता शुरू करने के मसले पर बर्न्स ने कहा कि अमरीका ऐसा चाहता है मगर इसकी राह दोनों देशों को ख़ुद चुननी होगी.
उन्होंने कहा, "अमरीका ने भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता और बेहतर संबंधों का हमेशा ही स्वागत किया है. मगर ये स्वाभाविक है कि वार्ता की गति, उसका दायरा और उसके तरीक़े पर भारत और पाकिस्तान के नेताओं को निर्णय करना होगा. वो वार्ता कैसे और कब शुरू हो ये उन्हें तय करना होगा."
मुंबई हमला
भारत-पाकिस्तान वार्ता अमरीका ने भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता और बेहतर संबंधों का हमेशा ही स्वागत किया है. मगर ये स्वाभाविक है कि वार्ता की गति, उसका दायरा और उसके तरीक़े पर भारत और पाकिस्तान के नेताओं को निर्णय करना होगा. विलियम बर्न्स, अमरीकी विदेश उप मंत्री
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मुंबई में पिछले साल 26 नवंबर को हुए हमलों के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच शान्ति प्रक्रिया ठप है. इस बारे में बर्न्स का कहना था कि उन हमलों के दोषियों को सज़ा दिलाना पाकिस्तान की ज़िम्मेदारी है.
बर्न्स ने कहा, "उस हमले के समय से ही अमरीका ने बहुत ही स्पष्ट तौर पर कह रखा है कि हमलों के दोषियों को सज़ा दिलवाना पाकिस्तान की विशेष ज़िम्मेदारी है."
बर्न्स ने इससे पहले दिन में भारतीय प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की थी.
उस मुलाक़ात में उन्होंने डॉक्टर सिंह को अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की एक चिट्ठी भी सौंपी.
बर्न्स ने बताया कि इस यात्रा में उन्होंने भारतीय नेताओं को ये संदेश दिया है कि अमरीका भारत के साथ रिश्तों को और मज़बूत करने के साथ ही उसे और व्यापक करना चाहता है.
उन्होंने बताया कि अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन जुलाई महीने के दूसरे हिस्से में भारत यात्रा पर आएँगी.


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