नेपाल की पहली उपप्रधानमंत्री का निधन
65 वर्षीय आचार्य का नाता राजनीति में बेहद सक्रिय परिवार से था। वह नेपाल की पहली ऐसी महिला राजनीतिज्ञ थीं जो उपप्रधानमंत्री के पद तक पहुंचीं। उन्हें बुधवार को स्थानीय टीचिंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इससे पहले उनका इलाज नई दिल्ली और बैंकाक के अस्पतालों में भी कराया गया था।
आचार्य नेपाल के प्रथम निर्वाचित प्रधानमंत्री बिश्वेश्वर प्रसाद कोइराला की भतीजी और बॉलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला की संबंधी थीं। उन्होंने भारत में नौ वर्ष निर्वासित रहकर बिताए थे। वह इंडियन कांग्रेस के वयोवृद्ध नेताओं विशेषकर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सरीखे समाजवादी नेताओं की करीबी थीं।
आचार्य ने लोकतंत्र समर्थक आंदोलन से प्रेरित होकर छात्र जीवन में ही राजनीति में कदम रख दिया था। उन्होंने नेपाल के तत्कालीन नरेश महेंद्र को काले झंडे दिखाए थे और इस आरोप में उन्हें तीन साल की कैद हुई थी।
वह नेपाली कांग्रेस की सदस्य थीं। उन्होंने पूर्वी नेपाल के मोरांग जिले दो बार चुनाव जीता था और वह नेपाल के उप प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने वाली पहली महिला बनीं। उन्होंने नेपाल में जल संसाधन मंत्रालय का कार्यभार भी संभाला।
नरेश ज्ञानेंद्र के सत्तारूढ़ होने के बाद आचार्य की स्थिति कमजोर पड़ने लगी। उनका कहना था कि महिला होने की वजह से उन्हें नेपाल के पुरुष प्रधान राजनीतिक हलकों में गंभीरता से नहीं लिया गया। संवैधानिक राजशाही का समर्थन करने के कारण वह विवादों में भी घिरीं और नेपाल के लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के दौरान उन्हें दो वर्ष तक भूमिगत रहना पड़ा। इसके अलावा उन्हें नौ साल भारत में निर्वासन में भी गुजारने पड़े।
दो साल पहले जब कोइराला ने अपनी पार्टी के सदस्यों और सहयोगियों के विरोध के बावजूद भारत में नेपाल के राजदूत के रूप में आचार्य के नाम की सिफारिश की, तो उनका राजनीतिक करियर के फिर से जमने के आसार दिखाई दिए। लेकिन इस बार किस्मत ने आचार्य का साथ नहीं दिया और उन्हें अल्जाइमर रोग के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।
उसके बाद से अखबारों में उनका जिक्र केवल उनकी गिरती सेहत संबंधी खबरों के साथ ही होता रहा जिनमें उनकी पार्टी पर इलाज में मदद नहीं करने का आरोप लगाया जाता था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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