पाकः राहत एजेंसियों ने मांगी मदद

राहत एजेंसियों के एक समूह ने आगाह किया है कि पैसे की कमी के कारण पाकिस्तान की स्वात घाटी में लाखों विस्थापितों की मदद करना मुश्किल हो जाएगा. स्वात में तालेबान के ख़िलाफ़ पाकिस्तानी सेना का अभियान शुरु होने के बाद से वहाँ से लाखों की संख्या में लोग इलाक़े से भाग चुके हैं.
नौ राहत एजेंसियों ने कहा है कि विस्थापित परिवारों की मदद के लिए उन्हें चार करोड़ बीस लाख डॉलर की धनराशि चाहिए. ऑक्सफ़ैम का कहना है कि अगर मध्य जुलाई तक पैसे का इंतज़ाम नहीं होता तो उसे इलाक़े से हटना पड़ेगा. ऑक्सफ़ैम के अधिकारी जेन कॉकिंग ने कहा है कि पैसा जुटाने की दृष्टि से पिछले एक दशक में ये शायद सबसे बड़ा संकट है.
लाखों विस्थापित
अगर पाकिस्तान के आम लोग और समुदाय के लोग मदद के लिए आगे नहीं आए होते तो संकट और भी गहरा हो सकता था. कैरोलीन मिलर
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अनुमान के मुताबिक संघर्ष शुरु होने के बाद करीब 25 लाख लोग स्वात से भाग चुके हैं हालांकि इनमें से कई लोगों की देखभाल उनके परिवारवाले दूसरी जगहों में कर रहे हैं.
अप्रैल के बाद इतनी बड़ी संख्या में विस्थापित हुए लोगों की देखभाल करने में राहत एजेंसियों को ख़ासी दिक्कत हो रही है. राहतकर्मियों को आशंका है कि जुलाई में मॉनसून आने के बाद तो हालात और भी मुश्किल हो जाएँगे और मलेरिया या डायरिया जैसी बीमारियाँ फैलने का डर बना रहेगा.
एक राहत एजेंसी की प्रमुख कैरोलीन मिलर का कहना है कि अगर पाकिस्तान के आम नागरिक और समुदाय के लोग मदद के लिए आगे नहीं आए होते तो संकट और भी गहरा हो सकता था. उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद आम लोगों ने विस्थापितों की मदद की है.कैरोलीन मिलर ने कहा कि विश्व के अमीर देशों को मदद के लिए और पैसे देने होंगे.
इस संकट के बारे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा है कि वर्ष 1947 में भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद ये सबसे बड़ा शरणार्थी संकट है.
'लोग तालेबान के ख़िलाफ़'
इस बीच पिछले कई दिनों से पाकिस्तान में सूबा सरहद में सैकड़ों की संख्या में क़बायली लोग तालेबान चरमपंथियों के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहे हैं.अपर दीर ज़िले में शुक्रवार की नमाज़ के दौरान हुए बम धमाके के बाद क़बायली लोग तालेबान के ख़िलाफ़ उठ खड़े हुए हैं.
बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि स्वात घाटी में तालेबान के ख़िलाफ़ पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई को लोगों का व्यापक समर्थन मिल रहा है. विपक्षी पार्टियाँ और कुछ धार्मिक नेता भी इसका समर्थन कर रहे हैं.
पाकिस्तान यात्रा से वाशिंगटन लौटे अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के लिए अमरीका के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रूक ने भी कहा है कि पाकिस्तान में लोग आतंकवादियों के विरुद्ध हो रहे हैं और सरकार के प्रति उनका समर्थन बढ़ रहा है. कुछ दिन पहले पाकिस्तानी सेना ने दावा किया था कि उसने उसने स्वात घाटी के सबसे बड़े नगर मिंगोरा पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लिया है.


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