'तालेबान के विरुद्ध हो रहे हैं आम पाकिस्तानी'

पाकिस्तान यात्रा से लौटने के बाद वॉशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत में हॉलब्रूक ने कहा कि पाकिस्तान में आम लोग अब तालेबान का विरोध कर रहे हैं और इससे वह काफ़ी संतुष्ट हैं.
उन्होंने कहा कि पेशावर में पर्ल होटल जैसी जगहों पर तालेबान की बमबारी जैसे अत्याचारों से लोगों के रवैये में नाटकीय बदलाव आया है.
अमरीका में बड़ी संख्या में राजनेता ये कहते आए हैं कि पाकिस्तानी सरकार और वहाँ की जनता उस क्षेत्र में इस्लामी चरमपंथ के विरुद्ध संघर्ष में दिल से उनके साथ नहीं हैं.
'मक़सद स्पष्ट'
मगर हॉलब्रूक ने कहा कि पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ सैनिक अधिकारियों से उनकी बातचीत में उन्हें ये बात समझ में आई है कि उन लोगों के सामने रणनीतिक मक़सद स्पष्ट है.
उन्होंने स्वात घाटी और अन्य क्षेत्रों में पाकिस्तानी सेना और तालेबान चरमपंथियों के बीच हुए संघर्ष में विस्थापित हुए पाकिस्तानियों की दुखद स्थिति की भी चर्चा की.
उन्होंने कहा कि ये एक गंभीर संकट है और शरणार्थियों को जल्दी से जल्दी घर वापस लौटना चाहिए.
हॉलब्रूक का कहना था कि अस्थाई शरणार्थी शिविर स्थाई नहीं हो जाने चाहिए.


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