गूगल ट्रांसलेटर में मानवीय संपादन भी

नए ट्रांसलेटर टूलकिट का लक्ष्य वे यूजर हैं जो अनुदित पाठ सामग्री को संपादित करना और निखारना के साथ इसे दूसरों के साथ शेयर करना या प्रकाशित करना चाहते हैं। यह जानकारी दी गूगल भारत के विकास और अनुसंधान के इंजीनियरिंग डायरेक्टर और सेंटर हेड प्रसाद राम ने।
गूगल की सांख्यिकीय मशीनी अनुवाद तकनीकी को इस तरह से तैयार किया गया है वह मुख्य भाषा और अनुवाद के लिए निर्धारित भाषा को समानांतर टेक्स्ट को चुनती है।
5 भारतीय भाषाओं में भी
राम ने बताया कि यूजर के जरिए टूलकिट का इस्तेमाल करके किए जा रहे अनुवाद की मदद से मशीनी अनुवाद प्रणाली को और ज्यादा बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। गूगल भारत के विकास और अनुसंधान लैब ने इस नए प्रोडक्ट को डेवलप किया है। राम ने बताया कि इसकी मदद से भाषाओं में अनुवाद और दूसरे कामकाज बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि गूगल के अनुवाद एप्लीकेशन जैसे प्रोडक्ट भारत में यहां की समस्याओं को ध्यान में रखकर अवश्य तैयार किए जा रहे हैं मगर इनका स्तर वैश्विक होगा।
टूलकिट पांच भारतीय भाषाओं समेत विश्व की 47 भाषाओं में इस टूलकिट का इस्तेमाल हो सकता है। बजाय नया कंटेट तैयार करने के गूगल के इस ट्रांसलेशन टूलकिट की मदद से लोग पहले से मौजूद कंटेंट का अपनी भाषा में इस्तेमाल कर सकते हैं।
विकिपीडिया से हुआ करार
विकिपीडिया के साथ हुए एक समझौते के तहत यूजर चाहें तो विकीपीडिया की कोई भी पोस्ट डाउनलोड करके सीधे उसका मशीन अनुवाद कर सकते हैं, अनुवाद के बाद टूलकिट का इस्तेमाल करते हुए वे उसमें संशोधन कर सकते हैं।
इस संपादन में एक दस्तावेज़ लेआउट का उपयोग किया जा सकता है, जिससे कि सामान्य उपयोगकर्ता परिचित हैं, राम ने कहा। इस सुविधा मे अनुवाद और फाइलों को निजी बनाए रखा जाएगा। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस टूलकिट का मेमोरी डाटाबेस पहले किए गए अनुवादों मे से समान वाक्यों और पाठ के आधार पर तैयार होता चला जाएगा। राम ने यह भी कहा कि इस टूलकिट का फायदा उन न्यूज साइटों के प्रकाशकों को मिलेगा जो स्थानीय भाषाओं के यूजर को अपना लक्ष्य बनाते हुए कम कीमत पर स्थानीय भाषाओं में संस्करण निकालना चाहते हैं।


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