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दस वर्षीय बच्ची ने कसाब की पहचान की

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Mumbai Fora

मुंबई हमलों के सिलसिले में बुधवार को 10 साल की बच्ची ने सुनवाई के दौरान गवाही दी. हमले में वो घायल हो गई थी और बैसाखियों का सहारा लेना पड़ता है. देविका नाम की इस बच्ची ने अजमल कसाब को देखकर कहा कि यही वो शख़्स है जिसने 26 नंवबर की रात को मुंबई के रेलवे स्टेशन पर गोलीबारी की थी. मुंबई हमलों के दौरान ज़िंदा पकड़े गए कसाब मामले के मुख्य अभियुक्त हैं.

वहाँ 57 लोगों की मौत हो गई थी. जबकि मुंबई के पूरे घटनाक्रम में नौ हमलावरों समेत 170 से ज़्यादा लोग मारे गए थे. देविका ने कोर्ट में कहा, “हम पूणे जा रहे थे, इसलिए स्टेशन पर थे. जब हमने शोर सुना तो मेरे पापा ने कहा कि हमें यहाँ से चलना चाहिए. लेकिन फिर मेरी दायीं टाँग में गोली लग गई. उसके बाद क्या हुआ मुझे याद नहीं."भारत के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने, हत्या और विस्फोटक रखने के आरोपों से अजमल कसाब इनकार करता रहा है.

'मैं झूठ नहीं बोल रही'

हम पूणे जा रहे थे, इसलिए स्टेशन पर थे. जब हमने शोर सुना तो मेरे पापा ने कहा कि हमें यहाँ से चलना चाहिए. लेकिन फिर मेरी दायीं टाँग में गोली लग गई. उसके बाद क्या हुआ मुझे याद नहीं.मैं झूठ नहीं बोल रही हूँ, मैंने भगवान की कसम खाई है. अगर आप शपथ लेकर झूठ बोलते हैं तो ये पाप है देविका

हम पूणे जा रहे थे, इसलिए स्टेशन पर थे. जब हमने शोर सुना तो मेरे पापा ने कहा कि हमें यहाँ से चलना चाहिए. लेकिन फिर मेरी दायीं टाँग में गोली लग गई. उसके बाद क्या हुआ मुझे याद नहीं.मैं झूठ नहीं बोल रही हूँ, मैंने भगवान की कसम खाई है. अगर आप शपथ लेकर झूठ बोलते हैं तो ये पाप है

इनदिनों मुंबई हमलों के मामले की सुनवाई चल रही है और देविका वहाँ गवाही देने वाली सबसे कम उम्र की गवाह हैं. जब भी उनसे सवाल पूछा जाता था तो संतरी रंग की फ्रॉंक पहनकर आई देविका अपने पिता को देखती. लेकिन उसने अदालत में बहुत संयमित होकर सवालों का जवाब दिया.

जज एमएल तहिलयानी ने देविका से बात की और सुनिश्चित किया कि वो शपथ ले सके और सवालों का जवाब दे सके. देविका ने कोर्ट में कसाब की पहचान की और कहा कि उसे कसाब को रेलवे प्लेटफ़ॉर्म पर देखा था. जब कसाब के वकील अब्बास काज़मी ने देविका से सवाल जवाब किया तो उसने कहा, "मैं झूठ नहीं बोल रही हूँ, मैंने भगवान की कसम खाई है. अगर आप शपथ लेकर झूठ बोलते हैं तो ये पाप है."

'भविष्य ख़राब कर दिया'

इससे पहले देविका के पिता नटवरलाल रोतावन ने माँग की थी कि कसाब को फाँसी की सज़ा होनी चाहिए. आक्रोश से भरे नटवरलाल रोतावन ने कहा, “इसी की वजह से शायद मेरी बच्ची का भविष्य कभी अच्छा नहीं होगा. इसे फाँसी की सज़ा दो."

इस दौरान कसाब नीचे देखता रहा.जब नटरवाल ने अपनी दास्तां बयां की तो कसाब काफ़ी गंभीर था. नटरवाल ने बताया कि मशीन गन लिए दो हमलावर रेल यात्रियों पर अंधाधुंध फ़ायरिंग कर रहे थे. नटरवाल ने ये भी बताया कि जब उनकी बेटी को गोली लगी और वो बेहोश हो गई तो वे अपने बेटे और बेटी के साथ रेलवे टर्मिनल से कैसे भागे.

जब उनसे कसाब की पहचान करने के लिए कहा गया तो वे चिल्लाने लगे और उन्हें शांत करवाना पड़ा. वे यही कहते रहे, “मेरी बेटी अब चल नहीं पाएगी, वो पीड़ा में है. उसका भविष्य हमेशा के लिए प्रभावित हो गया है. ये सब इसकी वजह से हुआ है, इसे फाँसी दो."

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