अमेरिका ने भारत-पाक वार्ता बहाल करने का समर्थन किया (राउंडअप)

अमेरिकी विदेश उपमंत्री विलियम बर्न्‍स ने गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भेंट की और उनसे भारत-अमेरिका परमाणु समझौता और भारत-पाकिस्तान रिश्तों सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

उन्होंने पत्रकारों से चर्चा में कहा, "अमेरिका ने भारत-पाक के बीच वार्ता को हमेशा प्रमुखता दी है और माना है कि दोनों देशों के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने का यह बेहतर कदम है। बातचीत की दशा और दिशा क्या होगी यह दोनों देशों को तय करना है।"

बर्न्‍स ने कश्मीर के मुद्दे पर संभलकर अमेरिकी राय रखी और कहा, "कश्मीरी जनता की आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान को स्पष्ट कर दिया है कि मुंबई हमले के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना उसकी विशेष जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बीच रूस में होने वाली प्रस्तावित मुलाकात दोनों देशों के बीच वार्ता आरंभ करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।

भारत और अमेरिकी रिश्ते को और भी मजबूती देने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन अगले महीने भारत दौरे पर आने वाली हैं। इस बीच बर्न्‍स ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का एक पत्र भी प्रधानमंत्री को सौंपा।

भारत के साथ मजबूती से काम करने के महत्व को रेखांकित करते हुए ओबामा ने मनमोहन को लिखे इस पत्र में कहा है कि भारत अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण देश है। पत्र के जरिए उन्होंने कहा कि भारत के साथ अमेरिका के रिश्तों में और भी मजबूती व गहराई को लेकर वह प्रतिबद्ध हैं।

बर्न्‍स ने बाद में पत्रकारों से चर्चा में कहा, "मैंने राष्ट्रपति बराक ओबामा का निजी संदेश प्रधानमंत्री को दिया जिसमें उन्होंने भारत के साथ रिश्तों को और भी मजबूती प्रदान करने की प्रतिबद्धता जताई है।"

उन्होंने कहा, "अमेरिका भारत को 21वीं सदी का एक महत्वपूर्ण वैश्विक सहयोगी मानता है। आने वाले दिनों में हम मिलकर बहुत कुछ कर सकते हैं।"

इससे पहले वाशिंगटन में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के विशेष अमेरिकी दूत रिचर्ड हॉलब्रुक ने यह सार्वजनिक किया था कि बर्न्‍स ओबामा का पत्र प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपेंगे।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रुक ने बुधवार को वाशिंगटन में इसका खुलासा करते हुए कहा था कि यह पत्र विदेश उपमंत्री विलियम बर्न्‍स भारत ले गए हैं। उन्होंने पत्र का विवरण नहीं बताया। मनमोहन सिंह सरकार के सत्ता में लौटने के बाद यह किसी अमेरिकी वरिष्ठ अधिकारी की पहली भारत यात्रा है।

कुछ पर्यवेक्षकों का कहना रहा है कि ओबामा की संपूर्ण नीति पाकिस्तान और अफगानिस्तान पर केंद्रित हो गई है। इसका स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारत समस्या का हिस्सा नहीं है लेकिन वह उससे काफी अधिक प्रभावित है और अमेरिका उसके साथ नजदीकी रूप से काम करना चाहता है।

हॉलब्रुक ने कहा, "यह निजी पत्र है लेकिन अहम बात यह है कि चुनावों के तत्काल बाद अमेरिकी विदेश विभाग के तीसरे प्रमुख व्यक्ति को वहां भेजा गया है।"

उन्होंने कहा कि बर्न्‍स सकारात्मक भावनाओं के साथ नई सरकार के साथ बातचीत की शुरुआत कर रहे हैं। हॉलब्रुक ने कहा, "भारत की राजनीति में शामिल हुए बगैर मैं कह सकता हूं कि हम सभी- विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन, बर्न्‍स, राष्ट्रपति ओबामा-सभी भारत की नवनिर्वाचित सरकार के साथ मिलकर काम करने के इच्छुक हैं।"

हॉलब्रुक ने कहा, "वह उस संदेश को साथ ले गए हैं जो यदि मेरे पास भारत यात्रा का समय होता तो अपने साथ मैं लेकर जाता।" हॉलब्रुक पिछले ही हफ्ते पाकिस्तान के दौरे से लौटे हैं। वह तालिबान के खिलाफ पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई की वजह से विस्थापित हुए लाखों लोगों के पुनर्वास कार्यो की समीक्षा के लिए गए थे।

उन्होंने कहा, "हम भारत को क्षेत्र का बेहद अहम देश मानते हैं। वह समस्या का अंग नहीं है बल्कि स्वयं काफी प्रभावित है और हम उनके साथ मिलकर बात करना चाहते हैं।"

हॉलब्रुक क्षेत्र के दो शुरुआती दौरों में पाकिस्तान की यात्रा पर आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह वह अमेरिका में भारत की राजदूत मीरा शंकर से भेंट करेंगे। उनसे वह पहले ही दो बार मुलाकात कर चुके हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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