बिना वित्त के जलवायु परिवर्तन उपायों पर अमल नहीं : भारत

बॉन, 11 जून (आईएएनएस)। भारत सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने कहा है कि औद्योगिक देशों के पर्याप्त वित्त और हरित प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के बगैर वह जलवायु परिवर्तन रोकने के उपायों पर अमल के निरीक्षण की अनुमति नहीं देगा।

बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) और हरित प्रौद्योगिकी को लागू करने में आने वाले खर्च को कौन उठाएगा? यह प्रश्न जलवायु संधि की राह में झगड़े का मुख्य कारण बना हुआ है। दिसम्बर में कोपेनहेगन में होने वाले जलवायु शिखर सम्मेलन की तैयारी के लिए जर्मनी के बॉन में एक से 12 जून तक चलने वाले तैयारी सम्मेलन में भी यह मुद्दा फिर उठा है।

भारत ने कहा है कि विकसित देशों को अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.8 प्रतिशत ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के लिए विकासशील देशों को देना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र के तत्वाधान में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) में हिस्सा ले रहे भारतीय प्रतिनिधिमंडल के वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि इसके अलावा उन्होंने हरित प्रौद्योगिकी से संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकारों को खरीदने के लिए एक वैश्विक कोष का भी प्रस्ताव रखा है। यह एचआईवी/एड्स की दवाओं के के संदर्भ में किए गए उपाय के समान है।

औद्योगिक देशों का कहना है कि मंदी के दौर में वे कोई वित्तीय वादा नहीं कर सकते और आईपीआर निजी संपत्ति हैं और सरकार इसमें कुछ नहीं कर सकती। चर्चा के मसौदे के अनुसार विकसित देश चाहते हैं कि भारत,चीन,ब्राजील, दक्षिण कोरिया और मेक्सिको जैसे विकासशील देश ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के लिए कदम उठाएं, जिनका निरीक्षण भी हो।

प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि भारत ने बंद दरवाजे के भीतर संपन्न बैठक में कहा कि पर्याप्त वित्त और बौद्धिक संपदा अधिकारों के मुद्दों को सुलझाए बिना वे इस पर सहमत नहीं होंगे।

भारत के नजरिए का जी-77 और चीन समर्थन कर रहे हैं जो जलवायु वार्ता में एक समूह के रूप में काम कर रहे हैं। समूह की ओर से बोलीविया,फिलीपींस और इंडोनेशिया ने हरित प्रौद्योगिकी के पेटेंटों को छोड़ने को कहा है।

बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रबल समर्थक जापान, कनाडा, अमेरिका,आस्ट्रेलिया और स्विट्जरलैंड ने तो पेटेंट प्रौद्योगिकी के अनिवार्य लाइसेंसीकरण का भी विरोध किया है जिसकी अनुमति व्यापार संबंधी बौद्धिक संपदा अधिकारों (ट्रिप्स) पर विश्व व्यापार संगठन समझौते(डब्ल्यूटीओ) के समझौते में है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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