झारखंड में पुलिस अधिकारियों और पुलिस संघ में आरोप-प्रत्यारोप शुरू
राज्य के पुलिस अधिकारियों ने इस घटना के लिए सुरक्षाकर्मियों को जिम्मेदार ठहराते हुए उन पर आरोप लगाया है कि बारूदी सुरंग बिछे होने की आशंका वाले संवेदनशील रास्तों पर उन्हें पैदल चलना चाहिए न कि गाड़ियों पर।
पश्चिमी सिंहभूम जिले के पुलिस महानिरीक्षक सुधीर कुमार झा ने कहा, "सुरक्षाकर्मियों ने ऐसी सड़कों पर पैदल चलने के सुझावों को नजरअंदाज किया।"
उधर, जेपीए ने इस घटना के लिए राज्य के पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है।
जेपीए के महासचिव चंद्रगुप्त सिंह ने आईएएनएस को बताया, "झारखंड के पुलिस प्रमुख विष्णु दयाल राम ने एक आदेश जारी किया है कि संवेदनशील रास्तों पर से गुजरने वाले सैन्य दल का नेतृत्व पुलिस उपायुक्त रैंक के किसी अधिकारी के हाथों में होना चाहिए। जबकि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का निरीक्षक बुधवार को हुई घटना के दौरान सैन्य बल का नेतृत्व कर रहा था। "
उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ के उक्त निरीक्षक को राज्य की भौगोलिक स्थिति की जानकारी नहीं थी।
उन्होंने कहा, "पुलिस अधिकारी मुख्यालय में बैठक करते हैं और रणनीति बनाते हैं। वे जेपीए के सदस्यों को इन बैठकों में नहीं बुलाते। यूं भी जंगलों में नक्सलियों से मोर्चा लेने के लिए पुलिस कांस्टेबल, उपनिरीक्षक और निरीक्षक जाते हैं। ऐसे में जंगलों में लड़ने वाले पुलिसकर्मियों की राय जाने बगैर पुलिस मुख्यालय में बैठे अधिकारी कैसे नक्सलियों का मुकाबला करेंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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