अमरीका के छोटे कारोबारियों को मदद

पश्चिमी देशों के लोगों की मदद से चलने वाला बैंक जो अभीतक ग़रीब देशों की मदद करता आया है अब अमरीका के छोटे कारोबारियों की भी मदद करेगा.दिलचस्प बात ये है कि 'कीवा' नामक ये बैंक पश्चिमी देशों के व्यक्तिगत दान दाताओं की मदद से चलता है और पिछले चार साल से विकासशील देशों के छोटे कारोबारियों को कर्ज़ दे रहा है.
अमरीका के छोटे कारोबारियों को कर्ज़ देने के फ़ैसले पर कीवा की अध्यक्ष प्रेमल शाल का कहना है कि अमरीका में एक करोड़ छोटे कारोबारियों को आर्थिक संकट की वजह से बैंक से कर्ज़ नहीं मिल पा रहा है, इसलिए ऐसा किया गया है. उनके अनुसार कीवा की स्थापना इसी मक़सद से हुई थी कि कोई भी अकेला व्यक्ति इंटरनेट की मदद से क़र्ज़ ले सकता है. कीवा ने विकासशील देशों में पाँच लाख कारोबारियों को लगभग आठ करोड़ डॉलर का कर्ज़ दे रखा है.
'ब्याज नहीं'
हम लोगों ने फ़ैसला किया कि इसे अमरीका में भी शुरू किया जाए, जहाँ 85 प्रतिशत कारोबार छोटे कारोबार हैं और लगभग एक कोरड़ ऐसे कारोबार हैं जिन्हें इस आर्थक संकट के बाद बैंक से क़र्ज़ नहीं मिल सकता कीवा की अध्यक्ष प्रेमल शाल
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ये बैंक ब्याज नहीं लेता, लेकिन पैसे की वापसी से पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही कर्ज़ देता है.इस बैंक से क़र्ज़ लेने के लिए देश की सीमा कोई बंधन नहीं हैं. दुनिया के किसी कोने में रहने वाला इस बैंक से कर्ज़ ले सकता है. इसलिए वियतनाम का छोटा कारोबारी या युगांडा में कपड़ा सिलने वाला इस बैंक से मदद पाने में कामयाब हो जाता है.
लेकिन कीवा अब कर्ज़ देने के सिलसिले में अमरीका को लोगों को भी शामिल करना चाहता है ताकि अमरीका के छोटे कारोबारी भी फ़ायदा उठा सकें. लेकिन विकसित देशों में अमरीका को ही क्यों चुना गया. प्रेमल शाह इसकी वजह बताती हैं, "हम लोगों ने समझा कि ग़रीबी इस ज़मीन पर हर जगह है और पहले की तुलना में इस समय छोटे कारोबारियों के लिए पैसा जुटाना कठिन है. "
शाह आगे कहती हैं," इसलिए हम लोगों ने फ़ैसला किया कि इसे अमरीका में भी शुरू किया जाए, जहाँ 85 प्रतिशत छोटे कारोबारी हैं और लगभग एक कोरड़ ऐसे कारोबारी हैं जिन्हें इस आर्थिक संकट के बाद बैंक से कर्ज़ नहीं मिल सकता." इसलिए अब नैरोबी में रहने वाले के लिए भी ये मुमकिन होगा कि वो न्यूयॉर्क में रहने वाले किसी की मदद कर सके.


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