ऑस्ट्रेलिया के अलावा भी कई विकल्प

आंकड़ों पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलिया में करीब 97000 भारतीय छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें 50 प्रतिशत छात्र वोकेशनल कोर्स के हैं, जो छह महीने से डेढ़ साले के लिए वहां गये हैं। भारतीय छात्रों को आकर्षित करने के लिए हर साल केवल विज्ञापन पर ही 3.5 अरब डालर खर्च किये जाते हैं। इससे अंदाजा हो सकता है कि ऑस्ट्रेलियाई संस्थानों को भारतीय छात्रों से कितना मुनाफा होता होगा।
नस्लीय हमलों से घट सकती है संख्या
पिछले एक महीने से लगातार बढ़ती नस्लीय हमलों की घटना का असर नये सत्र में देखने को मिल सकता है। क्योंकि कई और देश हैं, जहां भारतीय छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अमेरिका में करीब 94,000 भारतीय छात्र हैं। वहीं यूनाइटेड किंग्डम में 31000 और कनाडा में 7000 छात्र भारतीय हैं। इसके अलावा न्यूजीलैंड में यह संख्या 6000 के करीब है। सिंगापुर, आयरलैंड, फ्रांस और जर्मनी भी भारतीयों के लिए बड़े शैक्षिक केंद्रो के रूप में उभर रहे हैं।
हर साल करीब 160000 भारतीय पढ़ाई करेन के लिए विदेश जाते हैं। इंटरनेशन एजूकेशन कररियर कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल सबसे ज्यादा पूछताछ ऑस्ट्रेलिया के पाठ्यक्रमों के बारे में आती है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नस्लीय हमलों का असर ऑस्ट्रेलिया पर बुरी तरह पड़ सकता है। चूंकि भारतीय छात्रों के लिए अन्य देशों के विकल्प खुले हैं और पैसा भी लगभग उतना ही खर्च होना है, तो वो ऑस्ट्रेलिया क्यों जाएंगे।


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