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गूजर महापंचायत के लिए कड़ी सुरक्षा

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Gujjar Mahapanchayat

राजस्थान में गूजरों की महापंचायत को देखते हुए गूजार-मीणा बहुल पूर्वी राजस्थान में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. गूजर आरक्षण की माँग कर रहे हैं.गूजर नेताओं ने आरक्षण की माँग को लेकर भरतपुर ज़िले के मेहरावर गाँव में महापंचायत का आयोजन किया है.सरकार का कहना है कि सभा या पंचायत करने का अधिकार सभी को है, लेकिन क़ानून हाथ में लेने वालों से कड़ाई से निबटा जाएगा.

महापंचायत के आयोजक गूजर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला का कहना है, "राज्य की पिछली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने गूजर और कुछ अन्य जातियों के लिए पाँच फ़ीसद आरक्षण का प्रावधान किया था और विधयेक विधान सभा में पारित कर राज्यपाल को भेजा था. मगर राज्यपाल ने इसे रोक रखा है."बैंसला का कहना है, "मौजूदा कांग्रेस सरकार ने अबतक गूजरों के आरक्षण की माँग और पारित विधेयक पर अपना रुख़ साफ़ नहीं किया है."

जनजाति आरक्षण मुद्दा

ये पंचायत इसपर भी विचार करेगी कि जनजाति आरक्षण के मौजूदा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव होना चाहिए. सरकार ने गूजर नेताओं को कुछ शर्तों के साथ इस पंचायत की अनुमति दी है और हमने सरकार से वादा किया है कि पंचायत के दौरान पूरी तरह शांति रहेगी गूजर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला

ये पंचायत इसपर भी विचार करेगी कि जनजाति आरक्षण के मौजूदा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव होना चाहिए. सरकार ने गूजर नेताओं को कुछ शर्तों के साथ इस पंचायत की अनुमति दी है और हमने सरकार से वादा किया है कि पंचायत के दौरान पूरी तरह शांति रहेगी

भाजपा के टिकट पर 15वीं लोकसभा का चुनाव हार चुके बैंसला जनजाति आरक्षण पर वर्ष 2010 में संसद में होने वाली समीक्षा को भी मुद्दा बना रहे हैं. वे कहते है, "ये पंचायत इसपर भी विचार करेगी कि जनजाति आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव होना चाहिए. सरकार ने गूजर नेताओं को कुछ शर्तों के साथ इस पंचायत की अनुमति दी है और हमने सरकार से वादा किया है कि पंचायत के दौरान पूरी तरह शांति रहेगी."

पिछले अनुभवों को ध्यान में रखते हुए सरकार कोई जोखिम मोल लेने को तैयार नहीं है और भरतपुर ज़िले में कड़ी सुरक्षा व्यस्था की गई है. रेलवे ने भी रेलमार्ग और प्रमुख स्टेशन पर चौकसी बढ़ा दी है. गूजरों को आरक्षण देने की माँग को लेकर गूजर और मीणा समुदायों में पहले कटुता पैदा हो गई थी. मगर सरकार ने पिछले छह जून को दोनों समुदायों को जयपुर में एक साथ बैठाया और गिले-शिकवे दूर करवाए.

इस बैठक में मीणा समुदाय के नेताओं ने कहा कि वो गूजरों की माँगों के खिलाफ़ नहीं है, बशर्ते संविधान के दायरे में उन्हें आरक्षण दिया जाता है. उस बैठक के बाद गृह मंत्री शांति धारीवाल ने कहा था कि बैठक बहुत ही शांतिपूर्ण रही और दोनों पक्षों ने एक दूसरे को समझ कर अमन क़ायम रखने का वादा किया है.

उधर कुछ गूजर नेताओं ने बैंसला के इस आह्वान को राजनीति से प्रेरित बताया है. पूर्व विधायक गोपीचंद गूजर कहते है, "बैंसला पहले कहते रहे हैं वो कभी राजनीति में नहीं जाएंगे, न कभी चुनाव लड़ेगे. मगर वो भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर समाज का भरोसा खो चुके हैं."

पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल की भी ये ही राय है.वे कहते हैं," दो आंदोलनों में 70 लोगों की जानें चली गईं, लेकिन समाज को कुछ नहीं मिला. लिहाज़ा गूजर अब ऐसी पंचायतों से दूर ही रहेगा." लेकिन बैंसला को भरोसा है कि समाज अब भी उनके पीछे खड़ा है.

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