पूर्व आईएएस की मौत, डॉक्‍टरों पर आरोप

Uttar Pradesh
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व गृह सचिव मोहन स्वरूप की इलाज में कथित देरी की वजह से मंगलवार को मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि एक निजी अस्पताल द्वारा इलाज से इंकार करने के बाद उन्हें दूसरे अस्पताल ले जाया गया लेकिन इस बीच उनकी मौत हो गई।

स्वरूप को सोमवार देर रात दिल का दौरा पड़ा। घरवाले उन्हें फौरन इलाज के लिए स्थानीय लाइफ लाइन हार्ट हॉस्पिटल ले गए लेकिन उन्हें अस्पताल में भर्ती करने से इंकार कर दिया गया। दूसरे अस्पताल ले जाए जाने से पहले ही उनकी मौत हो गई।

डॉक्‍टरों ने एक न सुनी

स्वरूप से बेटे अक्षय स्वरूप ने बताया, "हमने अस्पताल के चिकित्सकों से कहा कि उनकी हालत बहुत नाजुक है और जल्दी से इन्हें भर्ती कर इलाज शुरू करें, लेकिन किसी ने हमारी फरियाद नहीं सुनी।"

उन्होंने कहा कि वहां मौजूद चिकित्सकों से गुहार लगाई गई कि वे आक्सीजन सिलेंडर का ही इंतजाम कर दें ताकि उन्हें जल्दी से दूसरे अस्पताल में दाखिल कराया जा सके लेकिन चिकित्सक वहां से चले गए और उन्होंने अस्पताल का दरवाजा बंद कर लिया।

डॉक्‍टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

अक्षय ने कहा कि उनका परिवार अस्पताल और चिकित्सकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के बाबत अपने वकील से बात कर रहा है। उधर यूपी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सचिव एमए खान ने कहा कि हम स्वरूप परिवार की हर संभव मदद करेंगे ताकि दोषी चिकित्सकों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।

लाइफ लाइन अस्पताल के निदेशक आशुतोष वशिष्ठ ने मामले पर कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। स्वरूप 1972 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी थे। वह उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष भी रहे थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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