इजरायली कंपनी को काली सूची में डालने से सेना का आधुनिकीकरण प्रभावित
आयुध कारखाना बोर्ड के सेवानिवृत्त अध्यक्ष सुदीप्त घोष के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के मामले में इजरायली मिलिट्री इंडस्ट्रीज (आईएमआई) का नाम सामने आने के बाद पांच जून से उसके साथ सभी प्रस्तावित सौदों को अस्थाई रूप से स्थगित कर दिया गया है।
इस प्रतिबंध का सबसे अधिक प्रभाव बिहार के नालंदा में आईएमआई के सहयोग से एक आयुध कारखाने के आधुनिकीकरण के 25 मार्च को हुए करार पर पड़ेगा। आयुध कारखाना बोर्ड (ओएफबी) के साथ हुए आईएमआई के समझौते के तहत 12 अरब रुपये की लागत से तेल अवीव के उपनगर रामात हाशरॉन में स्थिति आयुध फैक्टरी की तर्ज पर नालंदा कारखाने का आधुनिकीकरण किया जाना था।
इस परियोजना को 1990 के दशक के आखिरी दिनों में रक्षा मंत्री रहे जार्ज फर्नाडीज ने आरंभ किया था। दक्षिण अफ्रीका की रक्षा कंपनी डेनेल के सहयोग से नालंदा कारखाने का निर्माण होना था लेकिन डेनेल के भी काली सूची में जाने के बाद मामला अधर में लटक गया। इस कारखाने में बोफोर्स 155 होवित्जर तोपों के गोलों के साथ अन्य भारतीय कंपनियों के सहयोग से जिटारा कारबाइनों का निर्माण किया जाना था।
इजरायली कंपनी भारतीय सेना को उजी और टावोर सब-मशीनगन की भी आपूर्ति कर रही थी और 26/11 के मुंबई हमलों के बाद से मशीनगनों के और आदेश दिए गए थे। आईएमआई मध्य प्रदेश के खमरिया स्थित आयुध कारखाने में संयुक्त उपक्रम के तहत क्लस्टर बमों का भी उत्पादन करने वाली थी।
इजरायली कंपनी रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) को स्वदेशी अर्जुन टैंक के बारे में भी सलाह दे रही थी।
भारत इजरायली कंपनी के सहयोग से दो मीटर मोटे बंकर को भी तोड़ने लायक बम के संयुक्त विकास की परियोजना पर भी काम कर रहा था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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