ब्याज दरों में कटौती करें बैंक : मुखर्जी
उन्होंने कहा कि देश के केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा बैंकों का बोझ कम करने के लिए अनेक उपाय किए गए लेकिन उनका अपेक्षित असर दिखाई नहीं दे रहा है।
मुखर्जी ने यहां सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ एक बैठक में कहा, "सितम्बर 2008 और अप्रैल 2009 के बीच आरबीआई ने मुख्य दरें घटाईं और साथ ही बैंकों की मदद के लिए नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) व स्टैटुटरी लिक्वि डटी रेशियो (एसएलआर) में भी कमी की।"
उन्होंने कहा, "आज हमें अपनी अर्थव्यवस्था से काफी उम्मीदें हैं। पिछली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर 5.8 फीसदी थी और वर्ष 2008-09 की सालाना विकास दर 6.7 फीसदी के आसपास थी।"
उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों की बदौलत अर्थव्यवस्था में तेजी से सुधार होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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