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ब्रितानी प्रधानमंत्री ब्राउन पर बढ़ा दबाव

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ब्रितानी प्रधानमंत्री ब्राउन पर बढ़ा दबाव

नतीजों के बाद प्रधानमंत्री ब्राउन के ऊपर दबाव तो बना मगर पार्टी सांसदों की एक बैठक में अधिकतर सांसदों से उन्हें समर्थन मिल गया.

ब्राउन पर दबाव इसलिए और बन गया था क्योंकि यूरोपीय संसदीय चुनाव के नतीजे आने के बाद उनकी पर्यावरण मंत्री जेन केनेडी ने ये कहते हुए इस्तीफ़ा दे दिया कि वह नेता के तौर पर ब्राउन का समर्थन नहीं कर सकतीं.

इन चुनाव में ब्रिटेन में कंज़र्वेटिव पार्टी पहले नंबर पर और यूके इंडिपेंडेंस पार्टी दूसरे नंबर पर आई है. सत्तारूढ़ लेबर पार्टी को मिली ऐतिहासिक हार में पार्टी महज़ 15 प्रतिशत मतों के साथ तीसरे नंबर पर आ गई.

पार्टी सांसदों की बैठक में ब्राउन के कुछ विरोधियों ने खुलकर उनके इस्तीफ़े की माँग की मगर वे संख्या में कम ही थे. अधिकतर सांसदों ने ब्राउन के ही पद पर बने रहने की वकालत की.

ब्राउन ने इस बैठक में माना की उनकी कुछ कमज़ोरियाँ हैं मगर उन्होंने ये भी कहा कि अब आगे से वह लोगों की बातें ज़्यादा सुनेंगे.

राजनीतिक विश्लेषक और लेबर पार्टी की ओर से ब्रिटेन की संसद के ऊपरी सदन हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स के सदस्य लॉर्ड भीकू पारेख ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि अधिकतर सांसद अभी चुनाव नहीं चाहते.

लॉर्ड पारेख के मुताबिक़ लेबर पार्टी के सांसदों को मालूम है कि उनकी स्थिति अच्छी नहीं है और अगर अभी ब्राउन इस्तीफ़ा देते हैं तो चुनाव कराने होंगे और उन हालात में वे चुनाव हार भी सकते हैं.

ऐसे में अधिकतर सांसदों ने ब्राउन के ही प्रधानमंत्री बने रहने की वकालत की है.

उनके समर्थक उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले समय में गॉर्डन ब्राउन पार्टी को एकजुट कर पाएँगे और सरकार की विश्वसनीयता बनेगी.

मगर उनके विरोधियों के मुताबिक़ इस बार ब्राउन की स्थिति काफ़ी कमज़ोर हुई है और उनके नेतृत्त्व पर लोगों की उंगलियाँ उठनी बंद नहीं होंगी.

यूरोपीय चुनाव

कुल मिलाकर ये चुनाव उन पार्टियों और प्रत्याशियों की जीत दिखाते हैं जो यूरोपीय कार्यक्रमों का समर्थन करते हैं और जो रोज़मर्रा की अपनी चिंताओं के लिए यूरोपीय संघ से नीतिगत फ़ैसले चाहते हैं जोज़े मैनुएल बरोज़ो, अध्यक्ष- यूरोपीय आयोग

कुल मिलाकर ये चुनाव उन पार्टियों और प्रत्याशियों की जीत दिखाते हैं जो यूरोपीय कार्यक्रमों का समर्थन करते हैं और जो रोज़मर्रा की अपनी चिंताओं के लिए यूरोपीय संघ से नीतिगत फ़ैसले चाहते हैं

दरअसल यूरोपीय संसद के चुनाव में दक्षिणपंथी झुकाव वाली मध्यमार्गी पार्टियों ने अच्छा प्रदर्शन किया है. चुनाव में वाममार्गी पार्टियों को नुक़सान पहुँचा है.

धुर दक्षिणपंथी पार्टियों और आप्रवासन का विरोध करने वाली पार्टियों को भी चुनाव में कुछ फ़ायदा हुआ है. वैसे 30 साल से ये चुनाव हो रहे हैं और इस बार सबसे कम 43 प्रतिशत लोगों ने मतदान में हिस्सा लिया.

ब्रिटेन में सत्तारूढ़ लेबर पार्टी, जर्मनी में सोशल डेमोक्रेट्स और फ़्रांस में सोशलिस्ट पार्टी को ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ रहा है.

इस तरह यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जोज़े मैनुएल बरोज़ो लगातार दूसरी बार पद सँभालेंगे. उन्होंने मतदाताओं को इस नतीजे के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि उनकी आवाज़ यूरोप में सुनी जाएगी.

बरोज़ो ने कहा, "कुल मिलाकर ये चुनाव उन पार्टियों और प्रत्याशियों की जीत दिखाते हैं जो यूरोपीय कार्यक्रमों का समर्थन करते हैं और जो रोज़मर्रा की अपनी चिंताओं के लिए यूरोपीय संघ से नीतिगत फ़ैसले चाहते हैं."

समाजवादी नेता मार्टिन शुल्ज़ ने कहा है कि उनका गुट हार के कारणों की समीक्षा करेगा.

उनका कहना था, "यूरोप में समाजवादी लोकतंत्र के लिए ये एक बुरा दिन है. हम काफ़ी निराश हैं और ये हमारे लिए एक कड़वी शाम है."

हॉलैंड, ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, स्लोवाकिया और हंगरी में दक्षिणपंथी और आप्रवासन विरोधी पार्टियों को फ़ायदा पहुँचा है. ब्रिटेन में ब्रिटिश नेशनल पार्टी यानी बीएनपी को पहली बार दो सीटें मिली हैं.

पर्यावरणवादी पार्टियों को भी कुछ हद तक सफलता मिली है और पिछली बार की 43 सीटों के मुक़ाबले उन्हें इस बार 50 सीटें मिली है.

आर्थिक मंदी का सामना कर रहे कई देशों की सरकारों को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है. मगर फ़्रांस और जर्मनी में सत्तारूढ़ पार्टियों ने इस संकट के बावजूद अच्छा प्रदर्शन किया है.

प्रमुख नतीजों में फ़्रांसीसी राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी की यूएमपी ने समाजवादी विरोधियों को परास्त कर दिया है जबकि पर्यावरणवादी पार्टियों को भी बढ़त मिली है. इटली में प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी की दक्षिणपंथी झुकाव वाली मध्यमार्गी पार्टी को 35 प्रतिशत मत मिले, हालाँकि ये प्रतिशत आकलन से कहीं कम रहा और आप्रवासन विरोधी पार्टी को बढ़त मिली है. ब्रिटेन में सत्तारूढ़ लेबर पार्टी को काफ़ी ज़बरदस्त हार मिली है और उसका मत प्रतिशत लगभग एक शताब्दी में सबसे कम हो गया है. स्पेन में दक्षिणपंथी पॉपुलर पार्टी ने सत्तारूढ़ सोशलिस्ट्स को हराया है. पोलैंड की सत्तारूढ़ दक्षिणपंथी झुकाव वाली मध्यमार्गी सिविक प्लैटफ़ॉर्म को बढ़त मिली. पुर्तगाल में दक्षिणपंथी सोशल डेमोक्रेट्स को 31 प्रतिशत मत मिले जबकि सत्तारूढ़ सोशलिस्ट्स को 18 प्रतिशत का नुक़सान हुआ. ऑस्ट्रिया की धुर दक्षिणपंथी को पिछले यूरोपीय चुनाव के मुक़ाबले फ़ायदा हुआ मगर पिछले साल के राष्ट्रीय चुनाव के मुक़ाबले नुक़सान में है. ग्रीस की सोशलिस्ट पार्टी को बढ़त मिली.

    फ़्रांसीसी राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी की यूएमपी ने समाजवादी विरोधियों को परास्त कर दिया है जबकि पर्यावरणवादी पार्टियों को भी बढ़त मिली है. इटली में प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी की दक्षिणपंथी झुकाव वाली मध्यमार्गी पार्टी को 35 प्रतिशत मत मिले, हालाँकि ये प्रतिशत आकलन से कहीं कम रहा और आप्रवासन विरोधी पार्टी को बढ़त मिली है. ब्रिटेन में सत्तारूढ़ लेबर पार्टी को काफ़ी ज़बरदस्त हार मिली है और उसका मत प्रतिशत लगभग एक शताब्दी में सबसे कम हो गया है. स्पेन में दक्षिणपंथी पॉपुलर पार्टी ने सत्तारूढ़ सोशलिस्ट्स को हराया है. पोलैंड की सत्तारूढ़ दक्षिणपंथी झुकाव वाली मध्यमार्गी सिविक प्लैटफ़ॉर्म को बढ़त मिली. पुर्तगाल में दक्षिणपंथी सोशल डेमोक्रेट्स को 31 प्रतिशत मत मिले जबकि सत्तारूढ़ सोशलिस्ट्स को 18 प्रतिशत का नुक़सान हुआ. ऑस्ट्रिया की धुर दक्षिणपंथी को पिछले यूरोपीय चुनाव के मुक़ाबले फ़ायदा हुआ मगर पिछले साल के राष्ट्रीय चुनाव के मुक़ाबले नुक़सान में है. ग्रीस की सोशलिस्ट पार्टी को बढ़त मिली.
  • फ़्रांसीसी राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी की यूएमपी ने समाजवादी विरोधियों को परास्त कर दिया है जबकि पर्यावरणवादी पार्टियों को भी बढ़त मिली है.
  • इटली में प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी की दक्षिणपंथी झुकाव वाली मध्यमार्गी पार्टी को 35 प्रतिशत मत मिले, हालाँकि ये प्रतिशत आकलन से कहीं कम रहा और आप्रवासन विरोधी पार्टी को बढ़त मिली है.
  • ब्रिटेन में सत्तारूढ़ लेबर पार्टी को काफ़ी ज़बरदस्त हार मिली है और उसका मत प्रतिशत लगभग एक शताब्दी में सबसे कम हो गया है.
  • स्पेन में दक्षिणपंथी पॉपुलर पार्टी ने सत्तारूढ़ सोशलिस्ट्स को हराया है.
  • पोलैंड की सत्तारूढ़ दक्षिणपंथी झुकाव वाली मध्यमार्गी सिविक प्लैटफ़ॉर्म को बढ़त मिली.
  • पुर्तगाल में दक्षिणपंथी सोशल डेमोक्रेट्स को 31 प्रतिशत मत मिले जबकि सत्तारूढ़ सोशलिस्ट्स को 18 प्रतिशत का नुक़सान हुआ.
  • ऑस्ट्रिया की धुर दक्षिणपंथी को पिछले यूरोपीय चुनाव के मुक़ाबले फ़ायदा हुआ मगर पिछले साल के राष्ट्रीय चुनाव के मुक़ाबले नुक़सान में है.
  • ग्रीस की सोशलिस्ट पार्टी को बढ़त मिली.
  • इन चुनाव में मतदाता अपने-अपने देशों की राष्ट्रीय पार्टियों को ही चुनते हैं जो यूरोपीय संघ के स्तर पर अपने जैसी ही सोच वाले गुटों का हिस्सा होती हैं.

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