कौतूहल का कारण बना हुआ है एक पेड़
सिवान जिला मुख्यालय से करीब 22 किलोमीटर दूर मैरवां प्रखंड मुख्यालय स्थित लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) के कार्यालय परिसर में स्थित एक पेड़ इन दिनों लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है। इस पर कौए आकर बैठते हैं और मूर्छित होकर जमीन पर गिर जाते तथा छटपटा कर अपनी जान दे देते हैं। मृत कौओं की आंखों से खून तथा मुंह से झाग भी निकलता है।
मैरवां पीएचईडी में ऑपरेटर के पद पर कार्यरत सुदामा पांडेय बताते हैं कि यह सिलसिला पिछली 23-24 मई से चल रहा है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक दिन करीब दो से चार कौए इस पेड़ पर बैठकर अपनी जान गंवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि गत एक जून को सबसे अधिक 18 कौओं की मौत इस पेड़ पर बैठने के कारण हो गई थी।
स्थानीय लोगों की भीड़ इस पेड़ के किनारे पूरे दिन लगी रहती है। कुछ लोगों का मत है कि पेड़ से किसी जहरीली गैस का रिसाव हो रहा जिसके संपर्क में आने से कौओं की मौत हो रही है।
मैरवां के प्रखंड पशु चिकित्सा पदाधिकारी कुमार शिवम शरण का मानना है कि मृत कौओं के पोस्टमार्टम के बगैर उनकी मौत के कारणों को बता पाना कठिन है। हालांकि वे पेड़ पर किसी जहरीली गैस के रिसाव को पूरी तरह नकारते हुए कहते हैं कि गैस के संपर्क में आने से अगर मौत होती तो मृत कौओं की आंखों में से खून नहीं निकलता।
मैरवां निवासी रामशरण कुमार का मानना है कि सेमर के इस विशाल पेड़ के नजदीक एक तालाब है। रामशरण मानते हैं कि इस तालाब का पानी शायद कौओं के लिए दूषित हो गया हो और उसी पानी को पीकर कौए पेड़ पर बैठते हैं और मर जाते है। उन्होंने बताया कि कौओं के अलावा अन्य कई पक्षी सामान्य रूप से इस पेड़ पर प्रतिदिन आराम करते हैं, परंतु वे सामान्य रूप से रहते हैं।
इधर, पटना विश्वविद्यालय के एऩ के कॉलेज के वनस्पति शास्त्र के प्रोफेसर अशोक घोष ने भी आईएएनएस के साथ चर्चा करते हुए पेड़ से किसी जहरीली गैस के रिसाव की संभावना को नकारते हुए आशंका जताई कि शायद वह पेड़ बिजली के करंट के संपर्क में हो। हालांकि उन्होंने इसे जांच का विषय बताया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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