पाकः क़बायली हुए तालेबान के खिलाफ

पाकिस्तान में सूबा सरहद के अपर दीर ज़िले में शुक्रवार को हुए धमाके के बाद क़बायली लोगों ने तालेबान चरमपंथियों के ख़िलाफ़ संघर्ष शुरू कर दिया है. पिछले तीन दिनों से चल रहे इस संघर्ष में कम से कम 10 तालेबान चरमपंथियों के मारे जाने की बात कही जा रही है. शुक्रवार को अपर दीर ज़िले में शुक्रवार की नमाज़ के दौरान हुए बम धमाके के बाद क़बायली लोग तालेबान के ख़िलाफ़ उठ खड़े हुए हैं.
इस धमाके में 38 लोग मारे गए थे. गाँव के लोग इस धमाके के लिए तालेबान को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं. सूबा सरहद के स्वात ज़िले में पाकिस्तानी सेना भी तालेबान चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रही है. समाचार एजेंसी एपी ने स्थानीय अधिकारी आतिफ़-उर-रहमान के हवाले से बताया है कि क़रीब 400 क़बायली लोगों ने धोक डारा इलाक़े के पाँच गाँवों पर हमला किया.
इन गाँवों को तालेबान का गढ़ माना जाता है. शनिवार को ही क़बायली लोगों ने तीन गाँवों को अपने नियंत्रण में ले लिया था. रविवार से ये दो अन्य गाँवों से तालेबान चरमपंथियों को खदेड़ने की कोशिश में हैं.
संघर्ष
अधिकारियों के मुताबिक़ तालेबान चरमपंथियों को पनाह देने के संदेह में क़बायली लोगों के 20 घरों को तबाह कर दिया गया है. आतिफ़-उर-रहमान ने बताया, "ये बहुत सकारात्मक है कि क़बायली लोग तालेबान चरमपंथियों के ख़िलाफ़ खड़े हो रहे हैं. इससे इनका मनोबल गिरेगा." ज़िला पुलिस प्रमुख एजाज़ अहमद ने समाचार एजेंसी एपी को बताया है कि रविवार दोपहर तक कम से कम 11 तालेबान चरमपंथी मारे गए हैं. एजाज़ अहमद ने बताया कि क़रीब 200 चरमपंथी अब भी कड़ी टक्कर दे रहे हैं लेकिन लोगों ने इन्हें घेर लिया है.
पाकिस्तान सरकार तालेबान चरमपंथियों से लड़ने के लिए स्थानीय लोगों को अपनी ख़ुद की सेना का गठन करने के लिए बढ़ावा देती है, जिन्हें लश्कर कहा जाता है. बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि स्वात घाटी में तालेबान के ख़िलाफ़ पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई को लोगों का व्यापक समर्थन मिल रहा है. विपक्षी पार्टियाँ और कुछ धार्मिक नेता भी इसका समर्थन कर रहे हैं. शुक्रवार को अपर दीर ज़िले में शुक्रवार की नमाज़ के दौरान एक मस्जिद में धमाका हो गया था, जिसमें 38 लोग मारे गए थे.


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