सोनिया निर्विवाद रूप से देश की सबसे बड़ी राजनेता
नई दिल्ली, 8 जून (आईएएनएस)। लगभग एक दशक पहले भारतीय राजनीति में कदम रखने वाली कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी निर्विवाद रूप से आज देश की सबसे बड़ी राजनेता हैं। उनके विदेशी मूल को मुद्दा बनाकर उनकी आलोचना करने वाले भी आज उनके मुरीद बन गए हैं।
यूं तो सोनिया गांधी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार डा. मनमोहन सिंह ही हैं जिनके हाथों में लगातार दूसरी बार देश की कमान है। आम तौर पर तो यही कहा जाता है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की अध्यक्ष के नाते सत्ता की वास्तविक शक्ति सोनिया के ही हाथों में है।
नेताओं के साथ-साथ राजनीतिक विश्लेषक भी इस बात को अब स्वीकार कर रहे हैं कि सोनिया गांधी देश की सबसे लोकप्रिय नेता के रूप में उभर कर सामने आई है।
जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक महेश रंगराजन ने आईएएनएस से इस बाबत बातचीत में कहा, "सोनिया गांधी ने लगातार दूसरी बार कांग्रेस को सत्ता में पहुंचाया है। लोगों ने जो जनादेश दिया है उसी से सब कुछ स्पष्ट है।"
उन्होंने कहा, "सोनिया के विदेशी मूल का होना अब कोई मुद्दा नहीं रहा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कभी इस मुद्दे पर बहुत आक्रामक हुआ करती थी लेकिन इस बार उसने इस मुद्दे को छोड़ नकारात्मक प्रचार अभियान चलाया।"
सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर शरद पवार के साथ कांग्रेस छोड़ने वालों में प्रमुख रहे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता पी. ए. संगमा ने तो पिछले दिनों सारी पिछली बातें भूलाकर उनसे माफी तक मांग ली और कहा भी कि यह अब कोई मुद्दा नहीं रहा। कहा जा रहा है कि संगमा के इस रुख के पीछे उनकी बेटी अगाथा संगमा का बड़ा हाथ है।
एक वरिष्ठ वामपंथी नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "सोनिया गांधी की स्वीकार्यता उनके राजनीतिक जीवन के सबसे चरम पर है। राहुल गांधी के राजनीति में प्रवेश के बाद उनकी स्वीकार्यता और भी ज्यादा बड़ी है।"
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े शेषाद्रीचारी कहते हैं, "विदेश मूल का मुद्दा अब कोई मुद्दा नहीं रहा क्योंकि खुद सोनिया गांधी प्रधानमंत्री पद पर दावा करने के खिलाफ हैं। कांग्रेस यदि यह कहे कि सोनिया गांधी प्रधानमंत्री बनना चाहती हैं और इस बारे में वह यदि कोई जनमत संग्रह कराए तो शायद लोगों की प्रतिक्रियाएं भिन्न-भिन्न होंगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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