भारतीय छात्रों ने हमले के खिलाफ आस्ट्रेलिया में निकाली रैली (लीड-1)
हाथ में तिरंगा लिए और नारे लगाते हुए छात्रों ने रैली निकाली और हमले व लूट की घटनाओं के अपने अनुभवों का इजहार किया। छात्रों ने सरकार से नस्लीय हमलों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
सिडनी युनिवर्सिटी पोस्टग्रेजुएट रिप्रजेंटेटिव एसोसिएशन के अध्यक्ष रश्मि कुमार ने रैली को संबोधित करते हुए कहा, "अब हम सभी स्थानीय व अंतर्राष्ट्रीय छात्र एक ऐसी शिक्षा पाने के लिए एक साथ उठ खड़े हो सकते हैं, जो शोषण, नस्लवाद, हिंसा व भेदभाव पर आधारित नहीं होगी।"
कुछ समय के लिए टैक्सी चला कर अपनी पढ़ाई करने वाले एक छात्र नवजोत सिंह ने बताया कि किस तरह हाल में हमला कर उनके चेहरे पर चोट पहुंचाई गई थी। उसने कहा कि पुलिस हिंसा को रोक पाने में असहाय साबित हो रही है।
छात्र मांग कर रहे हैं कि विदेशी छात्रों को समुचित सुरक्षा मुहैया कराने के लिए आस्ट्रेलियाई शिक्षा और आव्रजन नीति में आमूलचूल बदलाव किया जाए।
आस्ट्रेलियन एसोसिएटेड प्रेस (एएपी) ने नेशनल यूनियन ऑफ स्टुडेंट्स के अध्यक्ष डेविड बैरो के हवाले से कहा, "काफी लंबे समय से यहां का शिक्षा क्षेत्र और यहां की सरकार अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के साथ मनुष्य की तरह नहीं बल्कि दूध देने वाली गाय की तरह व्यवहार कर रही है।"
दूसरी ओर मेलबर्न में शनिवार रात को कुछ संदिग्ध नशेड़ियों ने एक भारतीय छात्र की कार में आग लगा दी। पुलिस ने जहां इसके पीछे नस्लीय उद्देश्य से इंकार किया वहीं छात्र ने इसे नस्लीय हमला होने का दावा किया है।
विक्रांत राजेश रतन (22 वर्ष) ने पुलिस को बताया कि पैसे देने से इंकार करने पर कुछ नशेड़ियों ने उसकी और दो अन्य भारतीयों की कारों को जला दिया।
रतन ने एक समाचार चैनल से कहा, "उन्होंने मुझसे धन की मांग की लेकिन मैंने उनकी मांग ठुकरा दी। अगली रात उन्होंने मेरी कार जला दी।"
पुलिस के इसे एक नस्लीय हमला होने से इंकार करने के बारे में कहने पर छात्र ने कहा,"हमलावरों ने केवल मेरी कार को चुना। यह नस्लीय नजरिए से किया गया।"
उसने कहा कि नशेड़ियों ने पहले उसकी कार को खोलने का प्रयास किया और असफल रहने पर पेट्रोल डालकर उसे आग लगा दी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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