बेटी के हाथ पीले करने की चिन्ता से मिली मुक्ति
मुन्नी बाई को अपनी बेटी सरोज के जन्म के साथ ही उसके जीवन की चिन्ता थी। बेटी जब बड़ी हो गई तो वह उसकी शादी के लिये परेशान होने लगीं। इसकी मूल वजह यह थी कि मुन्नी बाई और उसके पति बादल सिंह की आय बहुत कम थी और वे चाह कर भी बेटी की शादी के लिए आवश्यक रकम नही जुटा पा रहे थे। बेटी की शादी तय करने के बाद भी रस्म अदायगी तक के लिये उनके पास पैसे नहीं थे।
मुन्नी बाई बताती है कि जब वह पैसे के लिये परेशान थीं तभी उन्हे मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के बारे में पता चला और वह अपनी बेटी के सामूहिक विवाह सम्मेलन में हाथ पीले करने में सफल हो सकीं। आज वह उस चिन्ता से पूरी तरह मुक्त है। जो उन्हें वर्षो से परेशान किये हुए थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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