सुंदरवन डेल्टा से एक लाख लोगों का पलायन

लोगों को आशंका है कि शनिवार को पूर्णिमा के कारण ज्वार-भाटा ‘भोरा कोतल’ से उठने वाली ऊँची समुद्री लहरें और तबाही मचा सकती हैं.
समाचार एजेंसियों के अनुसार सुंदरवन डेल्टा विकास के मंत्री कांति गांगुली ने कहा कि दक्षिणी 24 परगना ज़िले में बंगाल की खाड़ी के मुहाने पर स्थित क्षेत्रों कुमिरमारी, लाहिरीपुर, सतचेलिया, अमतोली, पाथारप्रतिमा और जी प्लॉट से एक लाख से ज़्यादा लोग पलायन कर गए हैं.
समुद्र में कम दबाव का एक और क्षेत्र बनने के चलते लोगों को आशंका है कि भारी बारिश हो सकती है. हालांकि, मौसम विभाग ने कहा है कि समुद्री तूफ़ान की चेतावनी जारी नहीं की गई है और अगले 24 घंटों में वर्षा होने की संभावना है.
किसी जनहानि से बचने के लिए दक्षिणी 24 परगना का ज़िला प्रशासन डेल्टा क्षेत्र के लोगों से ऊँचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने का आग्रह कर रहा है.
हम माक्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के असफल राहत पैकेज पर मुहर लगाने के मूड में नहीं हैं. हम लोगों के साथ हैं और अपने बूते काम करते रहेंगे. हमें अभी तक सरकार की तरफ से निमंत्रण नहीं मिला है. मैं इस बारे में अपनी नेता ममता बनर्जी से बात करूँगा पार्थो चटर्जी
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पलायन करने वाले कुछ लोगों ने अपने रिश्तेदारों के यहाँ शरण ली है तो कुछ ने स्कूलों की इमारतों में पनाह ली है.
बैठक और राहत
इस बीच, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिसमें राहत उपायों पर चर्चा होगी.
लेकिन ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने बैठक में शामिल होने के प्रति अनिच्छा जताई है. इस तरह ये भी पहले की ही तरह वामपंथी दलों की बैठक बन सकती है.
विपक्ष के नेता पृथा चटर्जी कहते हैं, "हम माक्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के असफल राहत पैकेज पर मुहर लगाने के मूड में नहीं हैं. हम लोगों के साथ हैं और अपने बूते काम करते रहेंगे. हमें अभी तक सरकार की तरफ से निमंत्रण नहीं मिला है. मैं इस बारे में अपनी नेता ममता बनर्जी से बात करूँगा."
ग़ौरतलब है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने समुद्री तूफ़ान आइला से हुई तबाही को देखते हुए केंद्र सरकार से इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है.
पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में इस तूफ़ान से हुई तबाही में दो सौ से ज़्यादा लोगों की जानें गई हैं और लाखों लोग बेघर हो गए हैं.


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