पढ़े-लिखे आतंकी बनाना मदनी का काम

संयुक्त पुलिस आयुक्त (विशेष शाखा) पी.एन.अग्रवाल ने संवाददाताओं को बताया, "वर्ष 2008 की गर्मी में जब मदनी पाकिस्तान गया था तो वहां उसकी मुलाकात जमात-उद-दावा व लश्कर नेतृत्व तथा लश्कर सरगना मोहम्मद याकूब तथा लश्कर आतंकियों, मोहम्मद उस्मान, सफीउल्लाह और अब्दुल नासिर से हुई थी।"
आतंकी बनने के लिए भी मिनिमम क्वालीफिकेशन
अग्रवाल ने कहा, "जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैयबा के नेतृत्व ने उसे कम से कम दो पढ़े-लिखे व्यक्तियों की भर्ती करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। इनमें से एक को कंप्यूटर विशेषज्ञ तथा दूसरे को दिल्ली, कोलकाता, मुंबई व चेन्नई जैसे महानगरों से कम से कम स्नातक होने की शर्त रखी गई थी।"
अग्रवाल ने कहा कि मदनी को कोंकण और मालबार के तटीय क्षेत्रों से प्रशिक्षण के लिए मछुआरों की भर्ती करने की भी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उसे तटीय क्षेत्रों से ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए कहा गया था जो नौ परिवहन और नाव चलाने में रुचि रखते हों।
अधिकारी ने खुलासा किया कि पूछताछ के दौरान मदनी ने स्वीकार किया है कि उसने इन वर्षो के दौरान 30 आतंकियों की नियुक्ति की, जिन्हें प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान भेज दिया गया। उसने भारत, नेपाल और बांग्लादेश में स्थित लश्कर के विभिन्न समूहों में हजारों रुपये बांटने का काम किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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