'अल्पसंख्यकों की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए'

ऑपरेशन ब्लूस्टार और सिख विरोधी दंगों पर अपना विरोध व्यक्त करने के लिए 18 वर्षीय अमरेंद्र और उनके साथियों ने विमान का अपहरण किया था.
अमरेंद्र सिंह का कहना है कि वर्ष 1984 में वे चंडीगढ़ स्थित श्री गुरु गोबिंद सिंह खालसा कॉलेज में प्री-युनिवर्सिटी यानी 11वी कक्षा के छात्र थे.
उस घटना के 25 साल बाद वे कहते हैं, "उस समय स्थिति काफ़ी तनावपूर्ण थी. सिख महसूस कर रहे थे कि समुदाय के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है. उनका कहना है कि दिमाग में ये सवाल उठते थे कि आख़िर सिखों के साथ ऐसा क्यों हो रहा है?"
'बदले की कार्रवाई'
अमरेंद्र सिंह बताते हैं कि उनकी उम्र कम थी और मन में उत्पीड़न का भाव था. ऑपरेशन ब्लूस्टार के बाद उन्होंने अपने साथियों से मिलकर विमान अपहरण की योजना बनाई.
उस समय स्थिति काफ़ी तनावपूर्ण थी. सिख महसूस कर रहे थे कि समुदाय के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है. उनका कहना है कि दिमाग में ये सवाल उठते थे कि आख़िर सिखों के साथ ऐसा क्यों हो रहा है? अमरेंद्र सिंह
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अमरेंद्र अपरहण की घटना को याद करते हुए कहते हैं कि वे सात लोग थे जिन्होंने मिलकर इस अपहरण को अंजाम दिया था. उनका कहना है कि इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए कोई बड़ी तैयारी नहीं की गई थी और आम तौर तरीकों से ही हवाई अड्डे के अधिकारियों को चकमा दे दिया गया.
फिर उन पर एंटी-हाईजैकिंग क़ानून का मुक़ादम चला. उनको और उनके साथियों को अजमेर, जोधपुर ओर चंड़ीगढ़ की जेलों में 12 साल की जेल काटनी पड़ी. फिर उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रिहाई मिली.
उनका कहना है, "जब सरकारें अल्पसंख्यकों की भावनाओं का ध्यान नहीं रखती तो किसी भी देश में अल्पसंख्यक बग़ावत कर सकते हैं. जब ऐसा होता है तो मानवता का काफ़ी नुक़सान होता है. यही भावना समस्या की जड़ है. "
उनके अनुसार सैद्धांतिक रुप से भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था काफ़ी अच्छी है लेकिन व्यवहारिक रुप से ऐसा नहीं है.


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