देखभाल नहीं करने पर बच्चों से संपत्ति वापस ले सकेंगे अभिभावक
केंद्र सरकार के नए कानून में यह प्रावधान है, जिसे राज्य सरकार ने जस का तस ही लागू कर दिया है। वरिष्ठ नागरिकों एवं अभिभावकों की देखभाल एवं कल्याण अधिनियम (मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट) में यह भी प्रावधान है कि कोई बच्चा अपने माता-पिता को जान बूझकर कहीं छोड़ आए तो उसे तीन माह की सजा हो सकती है।
यह जानकारी देते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता आयुक्त आर. वेंकटेश्वरन ने बताया कि इस अधिनियम में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को वरिष्ठ नागरिक माना गया है जबकि अभिभावक किसी भी आयु का हो सकता है।
अधिनियम में यह भी प्रावधान है कि कोई भी अभिभावक देखभाल के अभाव में अपने बच्चों से भरण-पोषण राशि की मांग कर सकता है। यह राशि 10 हजार रुपये प्रतिमाह तक हो सकती है।
अधिनियम के तहत सभी उपखंड अधिकारियों को न्यायाधिकरण घोषित किया है। इनके निर्णय की अपील जिला कलेक्टर के यहां की जा सकती है। बच्चों द्वारा देखभाल नहीं करने वाले अभिभावक न्यायाधिकरण में साधारण आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए वकील की जरूरत नहीं है। न्यायाधिकरण के आदेश की पालना नहीं होने पर तीन माह की जेल की सजा हो सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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