स्वच्छ ऊर्जा : विकसित देशों की तुलना में विकासशील देशों का निवेश बढ़ा
नई दिल्ली, 4 जून (आईएएनएस)। जलवायु परिवर्तन से निपटने के मसले पर भी वैश्विक आर्थिक संकट का असर दिखाई दे रहा है। स्वच्छ ऊर्जा संबंधी परियोजनाओं के मामले में जहां अमेरिका और यूरोप के विकसित देशों के निवेश में कमी आई है वहीं भारत व चीन समेत विकासशील देशों के निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की वेबसाइट पर जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2008 में यूरोप में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में हुए निवेश में दो फीसदी का इजाफा हुआ और यह बढ़कर 49.7 अरब डॉलर हो गया वहीं उत्तरी अमेरिका में इस में आठ फीसदी की कमी आई और यह 30.1 अरब डॉलर रह गया। विकासशील देशों का इस क्षेत्र में निवेश वर्ष 2007 की तुलना में 27 फीसदी बढ़कर 36.6 अरब डॉलर हो गया।
एशियाई देशों में चीन के निवेश में 18 फीसदी और भारत के निवेश में 12 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। दोनों ही देशों में अधिकांश निवेश पवन ऊर्जा के क्षेत्र में किया गया।
वर्ष 2008 में भारत में पवन ऊर्जा क्षेत्र में होने वाला निवेश 17 फीसदी बढ़कर 2.6 अरब डॉलर हो गया। इतना ही नहीं पर्यावरण समर्थक नीतियों की बदौलत सौर ऊर्जा के क्षेत्र में होने वाले निवेश में भी जबरदस्त इजाफा हुआ और यह वर्ष 2007 के 1.8 करोड़ डॉलर से बढ़कर वर्ष 2008 में 34.7 करोड़ डॉलर हो गया।
खराब आर्थिक हालात के बीच अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में जहां निजी निवेश में कमी आई वहीं विभिन्न सरकारों का निवेश बरकरार रहा। इस दौरान विभिन्न देशों की सरकारों ने जो आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज जारी किए उनमें अक्षय ऊर्जा पर खास ध्यान दिया गया।
यूएनईपी द्वारा लगाए गए एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2009 से 2011 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था के पांच प्रमुख सेक्टरों निर्माण, ऊर्जा, परिवहन, कृषि और जल के क्षेत्र में लगभग 750 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को संकट से उबारने के साथ-साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखा जा सके।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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