ओबामा ने मुस्लिम दुनिया को दिया शांति का संदेश (राउंडअप)

ओबामा के भाषण की समाप्ति पर काहिरा युनिवर्सिटी में उपस्थित दर्शकों की भीड़ ने ओबामा, ओबामा के नारे लगाए।

ओबामा ने अमेरिका और दुनिया के मुसलमानों के बीच तनाव पैदा करने के लिए अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों की भूमिका को स्वीकार किया। लेकिन उन्होंने इस तनाव का लाभ उठाने वाले हिंसक चरमवादियों की कड़े शब्दों में निंदा भी की।

ओबामा ने कहा, "मैं यहां अमेरिका और दुनिया के मुसलमानों के बीच एक नई शुरुआत की उम्मीद लेकर आया हूं। यह आपसी हितों और आपसी सम्मान पर आधारित होगा।"

ओबामा ने यह भी स्पष्ट किया कि इजरायल के साथ अमेरिका के रिश्ते अटूट हैं। उन्होंने मुस्लिम देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने की भी बात कही। लेकिन ओबामा ने मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों को लेकर मची होड़ के प्रति चेतावनी भी दी।

जर्मनी के बुशेवाल्ड में नाजी यातना केंद्र के अपने शुक्रवार के प्रस्तावित दौरे का हवाला देते हुए उन्होंने यहूदी विरोध की निंदा की और होलोकास्ट से इंकार को 'निराधार, अज्ञानता भरा और घृणापूर्ण' कहा।

ओबामा ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि फिलीस्तीनी लोगों की स्थिति दयनीय है। उन्होंने कहा कि फिलीस्तीनी लोगों के स्वाभिमान, अवसर और स्वराष्ट्र की वैधानिक मांग से अमेरिका मुंह नहीं फेरेगा। लेकिन फिलीस्तीनी लोगों को भी हिंसा का रास्ता त्याग देना चाहिए।

ओबामा ने इजरायली बस्तियों के विस्तार का भी विरोध किया।

ओबामा ने कहा, "अमेरिका और पूरी मुस्लिम दुनिया के व्यापारियों और सामाजिक संस्थाओं के बीच संबंध मजबूत बनाने का रास्ता तलाशने के लिए हम इस वर्ष एक सम्मेलन आयोजित करेंगे।" उन्होंने मुस्लिम देशों में प्रौद्योगिकी के विकास और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए एक नए कोष की स्थापना की घोषणा की।

ओबामा ने आर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कांफ्रेंस के सहयोग से पोलियो की समाप्ति के एक नए अंतर्राष्ट्रीय प्रयास को आरंभ करने की भी घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने मुस्लिम देशों में बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की बात कही।

ओबामा ने ईरान और अन्य देशों से परमाणु हथियार कार्यक्रमों को छोड़ने का आग्रह भी किया। ओबामा ने कहा कि परमाणु हथियारों के बारे में अमेरिका की चिंताएं बहुत स्पष्ट हैं। वह मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों की होड़ को रोकना चाहता है।

ओबामा के भाषण पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इजरायल ने कहा कि मुस्लिम व अरब दुनिया के साथ शांति की ओबामा की उम्मीदों के साथ वह अपने को साझा करता है।

समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक एक आधिकारिक बयान में इजरायल ने कहा कि इजरायली सरकार उम्मीद करती है कि काहिरा में ओबामा द्वारा दिया गया भाषण अरब और मुस्लिम दुनिया के बीच पुनर्मेल के एक नए युग का मार्ग प्रशस्त करेगा।

बयान में कहा गया है, "हम अमेरिकी राष्ट्रपति की उन उम्मीदों के साथ अपने को साझा करते हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि अमेरिकी प्रयास एक नए युग का मार्ग प्रशस्त करेगा जो विवादों को समाप्त करेगा और अरब द्वारा इजरायल को एक यहूदी देश के रूप में मान्यता दिलाने का रास्ता साफ करेगा।"

इसके पहले ओबामा ने अपने भाषण में लोकतंत्र व मानवाधिकारों का समर्थन किया था।

ओबामा ने अपने भाषण में महिलाओं की शिक्षा और उनके रोजगार का समर्थन करने के लिए मुस्लिम बाहुल्य देशों से अपील की।

ओबामा ने कहा, "मैं पश्चिम के कुछ लोगों के उस विचार को खारिज करता हूं, जिसमें वे कहते हैं कि सिर ढंकने वाली महिला किसी न किसी रूप में गैरबराबरी का शिकार होती हैं। लेकिन मैं नहीं मानता कि शिक्षा से वंचित कोई महिला बराबरी के दर्जे से भी वंचित होती है। लेकिन यह भी महज संयोग नहीं कि वे देश ज्यादा समृद्ध हैं, जहां महिलाएं सुशिक्षित हैं।"

ओबामा ने कहा, "हमारी बेटियां हमारे बेटों के जितना ही समाज को योगदान कर सकती हैं। हमारी समृद्धि सभी मानवता (महिला व पुरुष) को अपनी पूर्ण संभावनाओं को प्राप्त करने की छूट देने से ही हासिल होगी।"

ओबामा ने कहा कि कुछ मुसलामानों में दूसरों के धर्म को खारिज कर अपने धर्म को स्थापित करने की प्रवृत्ति होती है। उन्होंने कहा, "धार्मिक विविधता की खूबसूरती को हर हाल में बनाए रखना चाहिए। मुसलमानों के बीच विभाजन रेखा मिटा देनी चाहिए, क्योंकि शिया व सुन्नी के बीच का विभाजन खासतौर से इराक में त्रासदीपूर्ण हिंसा का कारण बना है।"

ओबामा ने कहा कि वह अमेरिकी मुसलमानों के लिए धार्मिक दान हेतु नियमों को लचीला बनाएंगे ताकि वे जकात जैसे अपने धार्मिक कर्तव्य का सहज रूप में बखूबी निर्वाह कर सकें।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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