नेपाल में 'एवरेस्ट मैराथन - 2009' में सेना दल की भागीदारी
'तेनजिग हिलेरी एवरेस्ट मैराथन कमेटी' तेनजिग नोर्गे और सर एडमंड हिलेरी द्वारा एवरेस्ट शिखर पर पहली बार आरोहण करने की स्मृति में हर साल मैराथन का आयोजन करती है। इसका आयोजन ओलंपिक नियमों के अनुसार होता है। इसमें हिस्सा लेने के लिए प्रतिभागियों को शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत मजबूत होना चाहिए।
एवरेस्ट आधार शिविर में जैसा माहौल होता है, उसकी जो ऊंचाई होती है, जैसा भाग होता है और जैसा मौसम होता है, इन सबसे मिलते-जुलते हालात में आर्मी एडवेंचर विग ने कड़े प्रशिक्षण के बाद चार सदस्यीय भारतीय दल का चयन किया।
मैराथन का आरंभ 18,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित एवरेस्ट आधार शिविर से और समापन नामचे बाजार (11,500 फुट) पर हुआ। इन दोनों सिरों के बीच पर्वतारोहियों को खुंबू घाटी स्थित हाईलैंड शेरपा राह से होते हुए हिमनद से होकर गुजरना पड़ा। इस तरह उन्होंने 42़2 किलोमीटर की दूरी तय की। 12 देशों - भारत, ऑस्ट्रिया, कनाडा, जर्मनी, जापान, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड, रोमानिया, दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका और इंग्लैंड के 52 प्रतिभागियों ने इस दौड़ में हिस्सा लिया। इन सभी देशों ने विदेशी वर्ग में हिस्सा लिया।
विदेश वर्ग में भारतीय सेना के व्यक्तिगत स्तर पर लांस-नायक श्याम केशो, एएसआई पुणे, प्रथम, लांस-नायक ओम कुमार, 63 इंजीनियर रेजिमेंट द्वितीय, ग्रेनेडियर थोटी गणपति, 114 मीडियम रेजीमेंट, तृतीय, और 18 मैकेनिकल इंफेन्ट्री के सिपाही राजेश कुमार, छठें स्थान पर रहे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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