कृषि उत्पादकता दोगुना करने की जरूरत : शरद पवार

पवार ने कहा कि इसके लिए फसलों की कटाई के बाद नुकसान को कम करना होगा, पर्यावरण के मुद्दों से निपटना होगा, खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाना होगा खासतौर से दलहन, तिलहन और दुग्ध पालन व मत्स्य पालन की क्षमताओं का इस्तेमाल करना होगा ।

नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साईन्सेस के स्थापना दिवस पर आज यहां वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए पवार ने कहा कि भूमि और भूजल संसाधनों में अभूतपूर्व क्षरण हुआ है। इसके अलावा देश के कई भागों में मृदा की क्षमता में कमी आई है। कुल उत्पादकता की विकास दर भी धीमी हुई है। इस रूझान को उलटने और कृषि उत्पादकता को दोगुना करने की जरूरत है ताकि बढ़ती खाद्य मांग को पूरा किया जा सके।

उन्होंने कहा कि यह चिता का विषय है। कटाई बाद अनाज के संदर्भ में होने वाला नुकसान बहुत ज्यादा है। घरों के भोजन, पोषकता और आजीविका सुरक्षा को बढ़ाने के लिए अनाज के भंडारण, यातायात, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन में सुधार की आवश्यकता है।

पवार ने इस आवश्यकता पर भी बल दिया कि आर्थिक सुधारों के लाभ को कृषि क्षेत्र और खेतिहर लोगों की आय बढ़ाने में भी लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गैर कृषि क्षेत्र के कामगारों की आय पिछले 25 वर्षो में दोगुने से ज्यादा हो गई है जबकि कृषि क्षेत्र में इसमें मामूली वृद्धि हुई है। परिणामस्वरूप गैर कृषि कामगार, खेतिहर लोगों की आय तुलना में पांच गुना ज्यादा कमाते हैं।

इस अवसर पर लब्ध प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिक एवं सांसद डा़ एम एस स्वामीनाथन और आईसीएआर के महानिदेशक डा. मंगला राय ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।

कृषि एवं खाद्य मंत्री शरद पवार ने नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइन्सेस के नए प्रकाशन स्टेट ऑफ इंडियन एग्रीकल्चर का विमोचन भी किया। इस प्रकाशन में उन कृषि और प्रमुख क्षेत्रों के विभिन्न क्षेत्रों की दशा का ब्योरा दिया गया है जिन पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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