राष्ट्रपति ने पेश किया सरकार के भावी कार्यक्रमों का खाका (राउंडअप)
राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में महिला आरक्षण विधेयक, आतंकवाद, विदेश नीति, अर्थव्यवस्था और वैश्विक आर्थिक मंदी सहित कई मुद्दों पर सरकार की राय सामने रखी। उन्होंने 100 दिनों के भीतर महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने के लिए कदम उठाने की सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाई।
राष्ट्रपति ने कहा कि मौजूदा वैश्विक मंदी के कारण वर्तमान वित्तीय वर्ष में विकास की गति धीमी होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था का प्रबंधन हमारी तात्कालिक प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि खंडवार और वृहद स्तर की नीतियों के संयोजन के जरिए वैश्विक मंदी का मुकाबला किया जा सके।
उन्होंने कहा, "सरकार ने इस अप्रत्याशित परिस्थिति से निपटने के लिए अनेक उपाय किए हैं। जिनमें तीन प्रोत्साहन पैकेज शामिल हैं। इनके परिणाम दिखने लगे हैं।"
उन्होंने कहा, "यह संतोषजनक है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को वैसी मंदी से नहीं गुजरना पड़ा जैसा विश्व में लगभग अन्य सभी देशों के साथ हुआ है।"
राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा, "हमारी तात्कालिक प्राथमिकता अर्थव्यवस्था के प्रबंधन पर केंद्रित करने की होनी चाहिए जिससे खंडवार तथा वृहत स्तरीय नीतियों के जरिए वैश्विक मंदी के प्रभाव को कम किया जा सके।"
विधानसभाओं और संसद में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने की सरकार की प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, "राज्य विधानमंडलों तथा संसद में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने के लिए संसद में महिला आरक्षण विधेयक को शीघ्र पारित करना सरकार की प्राथमिकताओं में है और इसे लागू करने के उपायों पर सरकार 100 दिनों के भीतर कदम उठाएगी।"
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार 100 दिनों के भीतर और भी महत्वपूर्ण कदम उठाएगी। पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने के लिए संविधान में संशोधन करेगी। केंद्र सरकार की नौकरियों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए संगठित प्रयास किया जाएगा और महिला केंद्रित कार्यक्रमों को मिशन के रूप में लागू करने के लिए महिला सशक्तिकरण पर एक राष्ट्रीय मिशन आरंभ किया जाएगा।
सरकार की विदेश नीति की स्वायत्तता और स्वतंत्रता बरकरार रखने की प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "मेरी सरकार की विदेश नीति की सामरिक स्वायत्तता और अपनी स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता को बरकरार रखते हुए राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाती रहेगी।"
राष्ट्रपति ने कहा, "सरकार पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को नया रूप देने का प्रयास करेगी जो इस बात पर निर्भर करेगा कि पाकिस्तान अपने क्षेत्र से भारत के खिलाफ आतंकवादी हमले करने वाले समूहों के विरूद्ध वास्तविक रूप से क्या कार्रवाई करता है।"
श्रीलंका के बारे में राष्ट्रपति ने कहा, "हम श्रीलंका सरकार के उन प्रयासों का समर्थन करेंगे जिनसे वहां के संघर्ष का स्थायी राजनैतिक समाधान हो सके और यह सुनिश्चित हो सके कि श्रीलंका के सभी समुदाय विशेषकर तमिल सुरक्षित महसूस करें और उन्हें समान अधिकार प्राप्त हों। भारत इस संघर्ष से प्रभावित लोगों के पुनर्वास में समुचित योगदान करेगा।"
अन्य पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर राष्ट्रपति ने कहा, "नेपाल और बांग्लादेश में जहां बहुदलीय लोकतंत्र वापस आ चुका है, आपसी हितों के लिए दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार को जारी रखने के लिए भारत निकटता से कार्य करेगा। भूटान और मालदीव के साथ भारत अपनी सघन और जीवंत सहभागिता सुदृढ़ करेगा और अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में सहयोग देना जारी रखेगा।"
उन्होंने कहा, "प्रमुख शक्तिओं के साथ हमारे संबंधों में सुधार की गति को बनाए रखा जाएगा। अमेरिका के साथ हमारी सहभागिता में आए बदलाव को और आगे बढ़ाया जाएगा। विगत वर्षो में रूस के साथ हमारी सामरिक भागदारी बढ़ी है। हम इसे और सुदृढ़ करेंगे। यूरोप के देशों और जापान के साथ उन सतत राजनयिक प्रयासों को जारी रखा जाएगा जिनके फलस्वरूप 2004 से हमारे संबंधों में गुणात्मक परिवर्तन आया है। चीन के साथ बहु आयामी साझेदारी का विस्तार किया जाएगा।"
आतंकवाद के मुद्दे पर राष्ट्रपति ने कहा कि आतंकवादी घटनाओं को रोकने के लिए एहतियाती कदम के तौर पर केंद्र सरकार आतंकवाद निरोधी केंद्र की स्थापना करेगी। इसके साथ ही इस समस्या से निपटने के लिए विशेष बल एवं त्वरित कार्रवाई दल भी गठित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा, "प्रत्येक नागरिक के लिए विशिष्ट पहचान पत्र स्कीम लागू करने का कार्य एक अधिकार प्राप्त समूह की निगरानी में तीन वर्षो में पूरा कर लिया जाएगा। इससे विकास कार्यो और सुरक्षा के लिए पहचान में मदद मिलेगी।"
उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार अल्पसंख्यकों के कल्याण को उच्चतम प्राथमिकता देना जारी रखेगी और एक समान अवसर आयोग स्थापित करेगी।
राष्ट्रपति ने कहा, "सरकार अल्पसंख्यकों के कल्याण को उच्चतम प्राथमिकता देना जारी रखेगी। अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री ने 15 सूत्री कार्यक्रम और सच्चर कमेटी की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई के तहत कुछ सीमा तक सरकार संसाधनों, नौकरियों और योजनाओं में अल्पसंख्यकों के लिए न्यायोचित हिस्सा सुनिश्चित करने में सफल रही है।"
उन्होंने कहा, "अल्पसंख्यकों के कल्याण की दिशा में उठाए जा रहे कदमों को और सुदृढ़ किया जाएगा। सरकार वक्फों के प्रशासन को सुदृढ़ करने और आधुनिक बनाने के लिए प्रयास करेगी, हज संचालन के प्रबंधन में सुधार लाएगी और एक सामन अवसर आयोग स्थापित करेगी।"
आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने के सरकार के इरादे को मजबूत बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि केंद्र सरकार ने इसके मद्देनजर भारत निर्माण योजना के दूसरे चरण के लिए और अधिक लक्ष्य तय करना प्रस्तावित किया है।
उन्होंने कहा, "सरकार ने पांच वर्ष पूर्व भारत निर्माण की ग्रामीण आधारभूत संरचना के लिए एक समयबद्ध कार्ययोजना प्रारंभ की थी। इस कार्यक्रम से सड़क, बिजली और टेलीफोन जैसी मूलभूत अवसंरचना को बहुत से गांवों में पहुंचाने में सफलता प्राप्त हुई है। इससे ग्रामीण जलापूर्ति, ग्रामीण आवास जैसे अधिकतर लक्ष्यों को प्राप्त कर लिया गया है और सिंचाई क्षमता में भी वृद्धि हुई है।"
उन्होंने कहा, "शहरी आवास कार्यक्रमों को स्लम बस्तियों में रह रहे गरीबों पर केंद्रित किए जाने की आवश्यकता है। ग्रामीण गरीबों के लिए इंदिरा आवास योजना की तर्ज पर स्लम बस्तियों के निवासियों और शहरी गरीबों के लिए राजीव आवास योजना प्रारंभ करने का प्रस्ताव है। सरकार का प्रयास होगा कि राजीव आवास योजना द्वारा पांच वर्षो में भारत को स्लम रहित कर दिया जाए।"
राष्ट्रपति ने करोड़ों प्रवासी भारतीयों को एक महत्वपूर्ण आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक ताकत बताया और कहा कि केंद्र सरकार इन प्रवासी भारतीयों से प्रगाढ़ संबंध स्थापित करेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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