चीन 1989 के दमन की वर्षगांठ पर खामोश (लीड-1)
विदेशों में रह रहे कुछ असंतुष्टों ने दमन में मारे गए सैकड़ों लोगों के प्रति शोक के प्रतीक के रूप में चीनी लोगों से गुरुवार को सफेद कपड़े पहनने का आग्रह किया था लेकिन बीजिंग की सड़कों पर ऐसा कोई चिह्न् नहीं दिखा कि लोगों ने उनकी आवाज पर ध्यान दिया हो।
अधिकारियों ने पूरे शहर में सुरक्षा बढ़ा दी थी और असंतुष्टों के घरों के आसपास तथा थ्येनमन चौक में सैकड़ों अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों को नियुक्त कर दिया। सरकारी मीडिया में दमन की वर्षगांठ के संबंध में कोई उल्लेख नहीं किया गया।
हांगकांग स्थित इंफारमेशन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स ने कहा कि 1989 के दमन में मारे गए लोगों के करीब 20 रिश्तेदारों को गुरुवार सुबह वान एन सार्वजनिक कब्रिस्तान में प्रार्थना करने की अनुमति दी गई।
सेंटर के अनुसार प्रदर्शनकारियों से सहानुभूति रखने वाली पूर्व पार्टी नेता जो जियांग की पुत्री को पुलिस की निगरानी में रखा गया।
लोकतांत्रिक आंदोलन के दमन के 20 वर्ष पूरे होने के मौके पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के असंतुष्टों और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं पर कड़ा नियंत्रण रखने के बावजूद निर्वासित नेताओं ने कहा कि राजनीति बदलावों की उनकी उम्मीद आज भी कायम है।
वर्ष 1989 में स्वतंत्र ट्रेड यूनियन का नेतृत्व करने वाले हैन डोंगफेंग ने इस मौके पर जारी बयान में कहा कि आज असंख्य चीनी लोग समृद्धि के अपने छोटे से सपने को वास्तविकता में बदलने के लिए विरोध को एक उपाय के रूप में देख रहे हैं।
इस समय हांगकांग से कामगारों के अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैन ने कहा कि लोकतंत्र की मांग को रोका नहीं जा सकता।
वर्ष 1989 के आंदोलन में शमिल हुए एक छात्र नेता वांग डान को नागरिक और कानूनी अधिकारों के लिए लड़ने वाले चीनी नागरिकों की बढ़ती संख्या में उम्मीद दिखाई दे रही है।
वांग ने ताइवान में हाल ही में डीपीए को दिए साक्षात्कार में कहा कि कुछ दिनों बाद नागरिक समाज की ताकत सरकार से अधिक हो जाएगी, तब चीन में लोकतंत्र आएगा।
वांग ने कहा कि वर्ष 1989 के सैनिक दमन के बाद कम्युनिस्ट पार्टी ने तेज आर्थिक विकास से अधिकांश चीनी नागरिकों और कई पश्चिमी सरकारों को संतुष्ट किया है लेकिन अर्थव्यवस्था में सुधार की गति धीमी होने के लिए उसे व्यापक सामाजिक आलोचना भी सहनी पड़ी।
उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार की गति धीमी होने से संकट बढ़ेगा और सरकार के लिए यह बड़ी चुनौती होगी। कोई नहीं जानता कि तब क्या होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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