ओबामा का लोकतंत्र व मानवाधिकारों के समर्थन का वादा (लीड-1)
ओबामा ने कहा, "जिस तरह हम किसी शांतिपूर्ण चुनाव के परिणाम का अनुमान नहीं लगा पाते, उसी तरह अमेरिका इस बात का अनुमान नहीं लगाता कि हर किसी के लिए सर्वोत्तम क्या है।"
ओबामा ने कहा, "लेकिन मेरा मानना है कि सभी लोग कुछ निश्चित बातों के प्रति उत्सुक होते हैं : अपनी आत्मा की आवाज व्यक्त करने की क्षमता और अपने को शासित किए जाने के तरीके की अभिव्यक्ति के लिए, कानून के शासन में भरोसा और समान न्याय व्यवस्था के प्रति, उस सरकार के प्रति जो पारदर्शी हो और जनता से दूर न भागती हो और जीवन जीने की आजादी के प्रति।"
ओबामा ने अपने भाषण में महिलाओं की शिक्षा और उनके रोजगार का समर्थन करने के लिए मुस्लिम बाहुल्य देशों से अपील की।
ओबामा ने कहा, "मैं पश्चिम के कुछ लोगों के उस विचार को खारिज करता हूं, जिसमें वे कहते हैं कि सिर ढंकने वाली महिला किसी न किसी रूप में गैरबराबरी का शिकार होती हैं। लेकिन मैं नहीं मानता कि शिक्षा से वंचित कोई महिला बराबरी के दर्जे से भी वंचित होती है। लेकिन यह भी महज संयोग नहीं कि वे देश ज्यादा समृद्ध हैं, जहां महिलाएं सुशिक्षित हैं।"
ओबामा ने कहा, "मैं यहां स्पष्ट कर दूं कि महिलाओं की बराबरी के मुद्दे सिर्फ इस्लाम के लिए एक मुद्दा नहीं है। अमेरिका और दुनिया के अन्य देशों में भी जीवन के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं की बराबरी के लिए संघर्ष लगातार जारी हैं।"
ओबामा ने कहा, "हमारी बेटियां हमारे बेटों के जितना ही समाज को योगदान कर सकती हैं। हमारी समृद्धि सभी मानवता (महिला व पुरुष) को अपनी पूर्ण संभावनाओं को प्राप्त करने की छूट देने से ही हासिल होगी।"
ओबामा ने कहा कि कुछ मुसलामानों में दूसरों के धर्म को खारिज कर अपने धर्म को स्थापित करने की प्रवृत्ति होती है। उन्होंने कहा, "धार्मिक विविधता की खूबसूरती को हर हाल में बनाए रखना चाहिए। मुसलमानों के बीच विभाजन रेखा मिटा देनी चाहिए, क्योंकि शिया व सुन्नी के बीच का विभाजन खासतौर से इराक में त्रासदीपूर्ण हिंसा का कारण बना है।"
ओबामा ने कहा कि वह अमेरिकी मुसलमानों के लिए धार्मिक दान हेतु नियमों को लचीला बनाएंगे ताकि वे जकात जैसे अपने धार्मिक कर्तव्य का सहज रूप में बखूबी निर्वाह कर सकें।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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