राष्ट्रपति अभिभाषण : मंदी से विकास गति धीमी होने की संभावना
संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में गुरुवार को नई लोकसभा के गठन के बाद संसद के पहले सत्र में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, "वैश्विक मंदी के कारण वर्तमान वित्तीय वर्ष में विकास की गति धीमी होने की संभावना है। सरकार ने इस अप्रत्याशित परिस्थिति से निपटने के लिए अनेक उपाय किए हैं। जिनमें तीन प्रोत्साहन पैकेज शामिल हैं। इनके परिणाम दिखने लगे हैं।"
उन्होंने कहा, "यह संतोषजनक है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को वैसी मंदी से नहीं गुजरना पड़ा जैसा विश्व में लगभग अन्य सभी देशों के साथ हुआ है। सरकार अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ, विशेष रूप से जी-20 के मंच के माध्यम से सक्रिय संपर्क में रही है ताकि वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके तथा आवश्यक सुधार किए जा सकें।"
राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा, "हमारी तात्कालिक प्राथमिकता अर्थव्यवस्था के प्रबंधन पर फोकस करने की होनी चाहिए जिससे खंडवार तथा वृहत स्तरीय नीतियों के जरिए वैश्विक मंदी के प्रभाव को कम किया जा सके।"
उन्होंने कहा, "सरकार प्रतिकूल रूप से प्रभावित सेक्टरों विशेषतया लघु एवं मध्यम उद्योगों, निर्यात, वस्त्र, वाणिज्यिक वाहन, अवसंरचना और आवास पर ध्यान केंद्रित करेगी।"
राष्ट्रपति ने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को एक समुचित नीतितंत्र के माध्यम से प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है। बैंकिंग और बीमा क्षेत्रों में संसाधनों को बढ़ाने की जरूरत है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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