सईद की रिहाई पर पाक मीडिया ने भी सवाल उठाया
समाचार पत्र 'डॉन' ने अपने संपादकीय में लिखा है कि सईद की रिहाई से पाकिस्तानी धरती से जेहादी संगठनों के नेटवर्क को समाप्त करने की सरकार की कोशिशों की ईमानदारी पर कई सवाल उठे हैं।
संपादकीय के अनुसार अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के सामने कमजोर प्रमाण पेश करके नजरबंदी की अवधि बढ़ाने का कोई मजबूत आधार नहीं पेश किया।
इस संदर्भ में डॉन ने कहा कि सरकार ने न्यायालय में भविष्य में सबूत उपलब्ध कराने के दाव का भी सहारा नहीं लिया। इससे एक खराब संकेत गया है। सरकार को खुलासा करना चाहिए कि वह आगे क्या करेगी या फिर वह भारत के साथ शांति प्रक्रिया आरंभ होने की एक और संभावना को गंवा दे।
समाचार पत्र 'डेली टाइम्स' के अनुसार सईद की रिहाई से राजनीति और न्याय व्यवस्था की जरूरतों के बीच का संघर्ष सामने आया है। यह अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और स्थानीय कानूनों के बीच भी एक प्रकार के विरोधाभास का संकेत है।
सईद की गिरफ्तारी मुंबई हमलों के बाद सुंक्त राष्ट्र द्वारा जमात-उद-दावा पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव के बाद हुई थी। डेली टाइम्स के अनुसार यदि कोई देश संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का पालन करना चाहता है तो उसके खुद के कानूनों की भी न्यायिक जरूरते पूरी करनी चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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