नागालैंड के अलगाववादी संगठन ने की शांति वार्ता की पेशकश
नई दिल्ली, 4 जून (आईएएनएस)। नागालैंड में प्रमुख अलगाववादी संगठन 'नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड' के एस.एस. खापलांग धड़े यानी 'एनएससीएन-के' ने केंद्र सरकार के साथ औपचारिक शांति वार्ता का प्रस्ताव रखा है।
एनएससीएन-के आठ वर्ष पहले संघर्ष विराम पर सहमत हुआ था। इस संगठन के नेता खुघालो मुलातोनू ने आईएएनएस से कहा, "अब हम भारत सरकार के साथ बिना शर्त वार्ता को तैयार हैं। हम चाहते हैं इसका औपचारिक निमंत्रण सरकार की ओर से आए।"
मुलातोनू इन दिनों दिल्ली में हैं। वह केंद्रीय गृह मंत्रालय से शांति प्रक्रिया के संबंध में संपर्क साधना चाहते हैं।
सरकार पहले ही 'एनएससीएन-के' के प्रतिद्वंद्वी धड़े एनएससीएन-आईएम के साथ बातचीत कर रही है लेकिन एनएससीएन-के साथ औपचारिक वार्ता अभी आरंभ नहीं हुई है।
म्यांमार में रह रहे 'एनएससीएन-के' के नेता खपलांग के विशेष दूत मुलातोनू ने कहा, "हमने बातचीत से इंकार किया था और हम चाहते थे कि पहले सरकार और एनएससीएन-आईएम के बीच वार्ता पूरी हो लेकिन दोनों पक्षों में पिछले दो वर्षो से कोई वार्ता नहीं हुई और ऐसे में हमने बातचीत की प्रक्रिया आरंभ करने का फैसला किया।"
एनएससीएन वर्ष 1988 दो धड़ों में बंट गया था। इन दोनों संगठनों की आपसी लड़ाई में पिछले पांच वर्षो में 500 से अधिक लोग मारे गए।
मुलातोनू का कहना है, "एनएससीएन-आईएम के नेता भारत सरकार की कठपुतली बन गए हैं और वे नागा लोगों की अकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सकते। एनएससीएन-के एकमात्र संगठन है जो नागालैंड के लोगों की समस्या का निदान कर सकता है।"
उन्होंने कहा, "सरकार के साथ वार्ता में संप्रभुता और दूसरी मांगों पर चर्चा हो सकती है लेकिन शांति वार्ता आरंभ होने से पहले हम कोई शर्त नहीं रखना चाहते।"
मुलातोनू ने यह भी कहा, "अगर भारत सरकार शांति प्रक्रिया के प्रति गंभीर दिखी तो क्षेत्र के दूसरे उग्रवादी संगठन भी शांति के रास्ते पर आ सकते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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