शेष विश्व से अधिक तेजी से गर्म हो रहा है हिमालय
नई दिल्ली, 4 जून (आईएएनएस)। गत 100 वर्षो में हिमालय के पश्चिमोत्तर हिस्से का तापमान 1.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है जो कि शेष विश्व के तापमान में हुए औसत इजाफे (0.5-1.1 डिग्री सेल्सियस) से अधिक है।
रक्षा शोध एवं विकास संस्थान (डीआरडीओ) और पुणे विश्वविद्यालय के भूगर्भ विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने क्षेत्र में बर्फबारी और बारिश की विविधता का अध्ययन किया और पाया कि बढ़ती गर्मी के कारण सर्दियों की शुरुआत देर से हो रही है और बर्फबारी में कमी आ रही है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि पश्चिमोत्तर हिमालय का इलाका पिछली शताब्दी में 1.4 डिग्री सेल्सियस गर्म हुआ है जबकि दुनिया भर में तापमान बढ़ने की औसत दर 0.5 से 1.1 डिग्री सेल्सियस रही है।
शोध का नेतृत्व करने वाले डीआरडीओ के वैज्ञानिक एम.आर. भुटियानी ने आईएएनएस को बताया, "अध्ययन का सबसे रोचक निष्कर्ष है पिछले तीन दशकों के दौरान पश्चिमोत्तर हिमालय क्षेत्र के अधिकतम और न्यूनतम तापमान में तेज इजाफा जबकि दुनिया के अन्य पर्वतीय क्षेत्रों जैसे कि आल्प्स और रॉकीज में न्यूनतम तापमान में अधिकतम तापमान की अपेक्षा अधिक तेजी से वृद्धि हुई है।"
भुटियानी ने कहा, "इस इलाके के गर्म होने की मुख्य वजह भी यही है। उसके अधिकतम और न्यूनतम तापमान में वृद्धि होना। खासतौर पर अधिकतम तापमान में तेजी से वृद्धि होना।"
इस क्षेत्र से संबंधित आंकड़े भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी), स्नो एंड अवलांच स्टडी इस्टेब्लिशमेंट (एसएएसई) मनाली ओर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रापिकल मीटरोलॉजी से जुटाए गए थे।
अध्ययन के मुताबिक वर्ष 1866 से 2006 के दरमियान मानसून और बारिश के औसत समय में भी महत्वपूर्ण कमी आई है। ठंड के दिनों में अब बर्फबारी कम और बारिश अधिक हो रही है। इसके अलावा ठंड के मौसम की अवधि पर भी नकारात्मक असर पड़ा है।
भुटियानी ने कहा कि ये सारे संकेत इलाके के पर्यावरण में हो रहे महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
**


Click it and Unblock the Notifications