'पूर्व सैन्य अधिकारी देखरेख में भारत भेजे जा रहे थे अवैध हथियार'
वह अधिकारी उन दिनों राष्ट्रीय सुरक्षा खुफिया विभाग (एनएसआई)में उपनिदेशक के रूप में कार्यरत था। हथियारों की खेप पकड़वाने में मदद करने वाले दो सैन्य अधिकारियों ने चटगांव की एक अदालत में (सेवानिवृत्त)मेजर लियाकत की पहचान की।
स्थानीय समाचार पत्र 'द डेली स्टार' के मुताबिक अधिकारियों ने बताया कि 30 मार्च, 2004 को लियाकत चटगांव के होटल गोल्डन इन में अबुल हुसैन के नाम से पहुंचा था।
लियाकत की देखरेख में 10 ट्रक हथियार और गोला-बारूद को चीन से खरीदा गया था और इसे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक वरिष्ठ सांसद के पोत के जरिए लाया गया था। ये हथियार भारत के पूवरेत्तर में सक्रिय उग्रवादी संगठन युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) को भेजे जा रहे थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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