हाफ़िज़ सईद को रिहा करने का आदेश

लाहौर हाईकोर्ट ने जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद को रिहा करने का आदेश दिया है. भारत ने कहा है कि मुंबई हमलों को लेकर पाकिस्तान गंभीर नहीं है. लाहौर हाईकोर्ट के बाहर हाफ़िज़ सईद के वकील एके डोंगर ने पत्रकारों को जानकारी दी,''अदालत ने कहा है कि हाफ़िज़ सईद की नज़रबंदी संविधान और क़ानून का उल्लंघन है.''
हाफ़िज़ सईद की रिहाई पर भारत ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि इससे यही स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान मुंबई हमलों में शामिल लोगों को सज़ा दिलवाने के प्रति गंभीर नहीं है.गृहमंत्री पी चिदंबरम ने पत्रकारों से बातचीत में कहा,'' इससे मुंबई हमलों की भारत में चल रही जांच पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा. हम इस बात से नाखु़श हैं कि पाकिस्तान को मुंबई हमलों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा दिलवाने के प्रति जो गंभीरता दिखानी चाहिए वो नहीं दिखा रहा.''
| हम इस बात से नाखु़श हैं कि पाकिस्तान को मुंबई हमलों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा दिलवाने की प्रति जो गंभीरता दिखानी चाहिए वो नहीं दिखा रहा |
उधर जमात-उद-दावा के प्रवक्ता याहया मुजाहिद ने इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस फ़ैसले से यह साबित होता है कि पाकिस्तान में न्यायपालिका स्वतंत्र है और यह किसी दबाव के तहत काम नहीं कर रही है.
उन्होंने कहा, "पाकिस्तानी सरकार, अमरीका और भारत के तरफ़ से काफ़ी दबाव थे. तीनों ही मिलकर ये चाह रहे थे कि हाफ़िज़ सईद की गिरफ़्तारी को जारी रखा जाए. सईद कोई आंतकवादी नहीं हैं और न ही जमात-उद-दावा कोई आतंकवादी संगठन है. हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद यह सच साबित हो गया है."
उल्लेखनीय है कि पिछले साल 26 नवंबर को मुंबई में हुए हमलों के बाद संयुक्त राष्ट्र ने जमात-उद-दावा को 'आतंकवादी संगठन' घोषित कर दिया था जिसके बाद पाकिस्तान में इस संगठन पर कार्रवाई शुरू हुई थी. इसी कार्रवाई के तहत 12 दिसंबर,2008 को हाफ़िज़ मोहम्मद सईद को एक महीने के लिए नज़रबंद कर दिया गया था, बाद में उनकी नज़रबंदी बढ़ा दी गई थी.हाफ़िज़ मोहम्मद सईद लाहौर के जौहर टाउन इलाक़े में स्थित अपने घर में नज़रबंद हैं.
लश्कर के संस्थापक
हाफ़िज़ मोहम्मद सईद लश्करे तैबा के संस्थापक हैं और उन्होंने 2001 में लश्कर का नेतृत्व छोड़ने की घोषणा करके जमात-उल-दावा की कमान संभाल ली थी. अदालत ने कहा है कि हाफ़िज़ सईद की नज़रबंदी संविधान और क़ानून का उल्लंघन है एके डोंगर, हाफ़िज के वकील
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जमात-उल-दावा को एक इस्लामी कल्याणकारी संस्था बताया जाता है लेकिन भारत का आरोप है कि लश्कर पर पाबंदी के बाद चरमपंथी कार्रवाइयों के लिए उसका इस्तेमाल किया जाने लगा है.सईद ने कहा था कि वे एक कल्याणकारी संस्था चलाते हैं जिसका मुंबई के हमलों से कोई लेना देना नहीं है. लेकिन भारत का कहना है कि जमात-उद-दावा असल में लश्करे तैबा का ही बदला हुआ नाम है.भारत का ये भी आरोप है कि मुंबई हमलों में लश्करे तैबा का हाथ है.


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