अलगाववादी नेता गिलानी गिरफ़्तार

अलगाववादी नेता गिलानी गिरफ़्तार

वो शाम चार बजे प्रेस कॉंफ़्रेंस करने वाले थे लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उनके घर पर छापा मारकर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया.

गिलानी पिछले दो महीने से अपने घर में ही नज़रबंद थे.

वो पिछले कुछ दिनों से शोपियाँ में दो महिलाओं की कथित हत्या का विरोध कर रहे थे.

गिलानी ने आरोप लगाया था कि इन महिलाओं की हत्या से पहले उनके साथ सुरक्षाकर्मियों ने सामूहिक बलात्कार किया था.

इस घटना के विरोध में हुर्रियत ने तीन दिनों के बंद का आह्वान किया था जिसका बुधवार को आख़िरी दिन है.

हुर्रियत नेता गिलानी बुधवार को प्रेस कॉंफ़्रेंस के ज़रिए अगली रणनीति की घोषणा करने वाले थे.

मौत पर रहस्य

ग़ौरतलब है कि कुछ दिनों पहले शोपियाँ में दो महिलाओं के शव मिले थे लेकिन किन स्थितियों में उनकी मौत हुई, ये पता नहीं चल सका है.

राज्य सरकार ने इस घटना की न्यायिक जाँच के आदेश दिए हैं.

आंदोलनकारियों का कहना है कि महिलाओं की हत्या से पहले उनके साथ बलात्कार हुआ

हालाँकि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि प्राथमिक पुलिस और चिकित्सा जाँच से पता चलता है कि महिलाओं के साथ बलात्कार नहीं हुआ था.

लेकिन उनके इस बयान को स्थानीय लोगों ने नकार दिया और इस घटना के विरोध में पिछले कुछ दिनों से भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

पीपुल्स डेमोक्रैटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ति ने अपने समर्थकों के साथ शोपियाँ का दौरा किया और मृत महिलाओं के परिजनों से मुलाक़ात की.

वहां से उनका काफ़िला जुलूस की शक्ल में शोपियाँ चौक पहुँचा लेकिन स्थानीय लोगों ने उनसे विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा देने की माँग की.

दरअसल अलगाववादी नेता पीडीपी के विरोध को ढोंग बता रहे हैं. उनका कहना है कि अगर सही मायने में महबूबा मुफ़्ती आंदोलन का समर्थन करना चाहती हैं तो पहले वो विधानसभा से हटें.

उपचुनाव

बंद के बीच ही हजरतबल विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव हो रहा है. ये सीट नेशनल कॉफ़्रेंस के नेता फारूक़ अब्दुल्ला की झोली में गई थी.

आंदोलनकारी भारत विरोधी नारे लगा रहे थे

लेकिन लोकसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया था.

एक मतदान केंद्र पर पीडीपी और नेशनल कॉंफ़्रेस के समर्थकों के बीच झड़पें हुई हैं जिसमें कई लोग घायल हुए हैं.

मतदान केंद्रों पर भीड़ नहीं दिखाई दे रही है.

बंद के कारण श्रीनगर और पूरी घाटी में जन-जीवन अस्त-व्यस्त है और अघोषित कर्फ़्यू जैसी स्थिति है.

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