पाकिस्तानी विस्थापितों ने सरकारी सहायता के लिए प्रदर्शन किया
इस्लामाबाद की व्यस्त सड़क पर करीब 200 प्रदर्शनकारियों ने रैली निकाली। इस दौरान उन्होंने नारे लगाए 'हमें भोजन चाहिए' और 'हम शांति चाहते हैं'।
उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत और देश के कुछ अन्य भागों में बनाए गए राहत शिविरों में केवल 20 फीसदी विस्थापित रह रहे हैं बाकी 80 फीसदी विस्थापित अपने रिश्तेदारों के साथ रह रहे हैं।
स्वात मुख्य शहर मिंगोरा के एक 35 वर्षीय दुकानदार मोहम्मद आलम ने कहा कि सरकार हमारे लिए कुछ भी नहीं कर रही है। हमें न तो पैसा, आटा, चीनी और न ही दवा मिल रही है।
आलम ने कहा कि मेरे परिवार के आठ सदस्य रिश्तेदारों के साथ रह रहे हैं। पिछले एक महीने से रिश्तेदार ही हमारे भोजन और अन्य जरूरतों का प्रबंध कर रहे हैं। उसने कहा कि वे गरीब हैं और बहुत दिनों तक हमारी खातिरदारी नहीं कर सकते। ऐसे में सरकार को हमारी मदद करनी चाहिए।
सेना का अभियान शुरू होने के बाद उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत के स्वात और अन्य तीन जिलों से करीब 25 लाख लोग विस्थापित हुए हैं। हालांकि विस्थापित लोगों के बारे में पाकिस्तान के अलग-अलग विभाग के आंकड़े अलग-अलग हैं।
उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत के समाज कल्याण विभाग ने कहा है कि उसने शरणार्थियों की संख्या 14 लाख दर्ज की है। उधर नेशनल डाटाबेस एंड रजिस्ट्रेशन अथारिटी के मुताबिक शरणार्थियों की संख्या 17 लाख है।
सेना ने जब 26 अप्रैल को अपना अभियान शुरू किया था तो उसने उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत के तीन जिलों में 4,000 से 5,000 तालिबानी आतंकवादियों की मौजूदगी का अनुमान लगाया था। अब उसका कहना है कि इनमें से आधे आतंकवादी अपनी दाढ़ी मुंडवाकर शरणार्थियों की आड़ में संभवत: भाग चुके हैं।
पाकिस्तानी सरकार ने शरणार्थियों के लिए प्रारंभिक सहायता राशि के रूप में 8 अरब रुपये की स्वीकृति दी है। इस राशि में से प्रत्येक परिवार को 25,000 रुपये देने की बात कही गई है। लेकिन शरणार्थियों का सही आंकड़ा नहीं होने की वजह से इसके बंटवारे में भी भ्रष्टाचार का बोलबाला है।
सेना ने कहा कि उसने अब तक 1300 तालिबानी आतंकवादियों को मार गिराया है। लेकिन उसने अभियान को लेकर कोई समय सीमा नहीं तय की है। ऐसे में यह बताना मुश्किल है कि शरणार्थी कब तक अपने घरों को लौट सकेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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