श्रीलंका में पत्रकार पर हमला

पोदला जयंता को सरकार विरोधी माना जाता है और वे मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर चले अभियान में शामिल रहे हैं.
उन्हें सर और टाँगों में चोट लगी है. हमला कोलंबो के निकट उनके घर के पास हुआ.
श्रीलंका में आलोचकों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में स्थानीय मीडियाकर्मियों पर काफ़ी दवाब रहा है. स्वतंत्र विचारों वाले कई पत्रकारों की हत्या हो चुकी है.
पोदाला जंयता श्रीलंका पत्रकार एसोसिएशन के महासचिव थे. उनका सोमवार को उस समय अपहरण कर लिया गया था जब वो अपने घर के बाहर सैर कर रहे थे.
उनके सहयोगियों का कहना है कि कुछ लोग आए, उन्हें सफ़ेद वैन में धकेला और ज़बरदस्त पीटाई की.
आलोचना
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि उन्हें घायल अवस्था में छोड़ने से पहले हमलावरों ने उनकी दाड़ी और बाल काट दिए.
कोलंबो राष्ट्रीय अस्पताल में डॉक्टरों का कहना है कि उनकी जान को ख़तरा नहीं है. पुलिस ने कहा है कि अब तक किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया है.
बीबीसी संवाददाताओं के मुताबिक सरकार से जुड़े राजनेता पोदाला जयंता को सरकार विरोधी अभियान चलाने वालों में गिनते हैं जिन्होंने सरकार की छवि ख़राब की है.
उन्हें पहले भी अपहृत करने की कोशिश की जा चुकी है. इस कारण पोदाला जंयता ने कुछ समय श्रीलंका से बाहर बिताया था और वे कुछ हफ़्ते पहले ही श्रीलंका लौटे थे.
मीडिया की स्वतंत्रता के लिए काम करने वाले संगठन लगातार श्रीलंका सरकार की आलोचना करते रहे हैं कि वो पत्रकारों को हमलों से बचाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे रही है. और न ही ऐसे मामलों में कोई मामला दर्ज हो हो रहा है.
इससे पहले सरकार ने संसद में कहा था कि 2006 के बाद से नौ पत्रकार मारे जा चुके हैं और 25 पर हमला हुआ है.
एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि मौत की धमकियों के कारण 20 पत्रकार श्रीलंका छोड़ कर जा चुके हैं.
मीडिया गुटों का कहना है कि पत्रकारों के लिए श्रीलंका विश्व के सबसे ख़तरनाक देशों में से है.


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