सत्यमः सरकारी दखलंदाजी क्यों?

दूसरी बड़ी वजह यह भी है कि साफ्टवेटर बिजनेस का कर्मचारी अपनी सेलेरी घटने के विकल्प में नई जॉब तलाशना ज्यादा पसंद करेगा। लिहाजा सरकार का उनकी जॉब को बचाए रखने की कवायद का बहुत मतलब नहीं रह जाता है।
यह भी गौर करने वाली बात है कि सरकार का सत्यम में कोई स्टेक नहीं और न ही सरकार की तरफ से कोई रकम कंपनी में निवेश की गई है। यदि सरकार कंपनी चलाने के तौर तरीकों में हस्तक्षेप करती है तो यह सत्यम का अधिग्रहण करने वाली कंपनी टेक महिंद्रा के साथ भी नाइंसाफी होगी।
सिर्फ इतना ही नहीं मंदी के दौर में खुद को घाटे से उबारने के लिए बहुत सी कंपनियों ने ले-आफ का सहारा लिया। इसमें से किसी भी कंपनी के फैसले में सरकारी हस्तक्षेप नहीं हुआ, फिर सत्यम को अपवाद क्यों बनाया जा रहा है? यह न तो कंपनियों के हित में है, न अर्थव्यवस्था के और न ही देश के। यह सिर्फ भारतीय उद्योग जगत के सबसे बुरे दिन 'लाइसेंस राज' के लौटने का बहाना बन सकता है।


Click it and Unblock the Notifications