मुंबई आतंकवादी हमलों के मास्टरमाइंड को लाहौर उच्च न्यायालय ने दी रिहाई (लीड-1)
जमात-उद-दावा के प्रवक्ता ने लाहौर में संवाददाताओं को बताया कि नजरबंद सईद को रिहा कर दिया गया है। उन्होंने कहा, "सईद आतंकवादी नहीं है और ना ही जमात-उद-दावा ही आतंकवादी संगठन है।"
सईद के वकील ए के डोगर ने बताया कि लाहौर उच्च न्यायालय ने सईद को हिरासत में रखे जाने को अवैध करार दिया और उन्हें रिहा कर दिया गया।
गत 30 मई को पाकिस्तान सरकार ने लाहौर उच्च न्यायालय को अल कायदा से सईद के रिश्ते होने के प्रमाण पेश किए। जियो टीवी के अनुसार अधिवक्ता लतीफ खोसा ने बंद कमरे में चली सुनवाई के दौरान अदालत को बताया, "जमात-उद-दावा का ताल्लुक अल कायदा से है। मुंबई हमलों में शामिल एक आतंकवादी का संबंध जमात-उद-दावा से है।"
सईद लश्कर-ए तैयबा का संस्थापक है। इस संगठन का मुंबई पर 26-29 नवंबर को हुए आतंकवादी हमलों में हाथ माना जाता है। भारतीय संसद पर 13 दिसंबर के आतंकवादी हमलों के बाद अंतर्राष्ट्रीय दबावों की वजह से पाकिस्तान सरकार द्वारा लश्कर पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद उसने जमात-उद-दावा के रूप में काम शुरू किया।
मुंबई हमलों के सिलसिले में एकमात्र जीवित पकड़े गए आतंकवादी अजमल आमिर कसाब ने कबूल किया है कि वह पाकिस्तानी है और मुंबई हमलों के उसे लश्कर ने प्रशिक्षित किया।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार गत दिसंबर में संयुक्त राष्ट्र द्वारा लश्कर-ए तैयबा के गुट जमात-उद-दावा को आतंकवादी संगठन लश्कर-ए तैयबा का संगठन घोषित किए जाने के बाद सईद को दिसंबर में हिरासत में लिया गया था। उसे शुरुआत में एक महीने के लिए हिरासत में लिया गया था। बाद में उसकी हिरासत की अवधि बढ़ती गई और पांच मई को उसकी हिरासत 60 दिन बढ़ा दी गई।
संयुक्त राष्ट्र की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान सरकार ने जमात-उद-दावा के 40 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया और देश भर में चलाए जा रहे उसके दर्जनों कार्यालयों और राहत केंद्रों को बंद कर दिया गया।
भारत ने गत जनवरी में पाकिस्तान को मुंबई आतंकवादी हमलों के पीछे लश्कर तथा कुछ पाकिस्तानी नागरिकों का हाथ होने के संबंध में सबूत सौंपे। मुंबई पर हुए इन हमलों में 26 विदेशियों समेत 170 से ज्यादा लोग मारे गए थे।
फरवरी में पाकिस्तान ने कबूल किया कि मुंबई हमलों की कुछ साजिश उसी की धरती पर रची गई थी और उसने भारत की ओर से सौंपे गए प्रमाणों के संबंध में 30 प्रश्न भी सौंपे। भारत ने इसका जवाब मार्च में दिया। इसके बाद पाकिस्तान ने एक बार फिर से स्पष्टीकरण मांगा जिसका जवाब भारत ने उपलब्ध करवा दिया।
इससे पहले दिसंबर 2008 में भी पाकिस्तानी प्रशाासन ने लश्कर के कमांडर जकीउर रहमान लखवी को गिरफ्तार किया था। भारत ने लखवी और मुंबई हमलावरों के बीच टेलीफोन पर हुए संवाद संबंधी सबूत सौंपे थे। यह सबूत एफबीआई ने मुहैया कराए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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