भारतीयों की सुरक्षा का मामला आस्ट्रेलियाई संसद में उठा
विदेशमंत्री स्टीफन स्मिथ ने संसद में अपने बयान में कहा कि आस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहे या रोजगार में लगे भारतीय युवाओं पर हमले की सरकार निंदा करती है।
स्मिथ ने कहा कि भारत के 90,000 से अधिक छात्र उनके देश के सम्मानित अतिथि हैं। शुक्रवार को भारत के विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा को नियुक्ति की बधाई देने के साथ ही उन्होंने इस मुद्दे से निपटने की सरकार की गंभीरता के बारे में उन्हें बता दिया है।
उन्होंने कहा कि भारत में आस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त जान मैकार्थी ने भी भारतीय अधिकारियों को इस संदर्भ में आश्वस्त किया है। सरकार इस संदर्भ में राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रही है।
स्मिथ ने कहा कि सरकार ने विदेशी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक कार्यबल का गठन किया है। इसमें विदेश विभाग, व्यापार, शिक्षा और रोजगार विभागों के प्रतिनिधि शामिल हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डंकन लेविस ने आज इसकी पहली बैठक की अध्यक्षता की।
उन्होंने कहा कि विक्टोरिया प्रांत के प्रधानमंत्री जान ब्रम्बी ने नस्लीय हमलों से निपटने के अधिक कड़े दंड का प्रावधान करने वाला प्रस्ताव आगे बढ़ाया है।
प्रधानमंत्री ने विधानसभा में कहा कि अटार्नी जनरल ने नस्लीय हिंसा के लिए अधिक कड़े दंड देने का प्रस्ताव किया है।
अटार्नी-जनरल रॉब हल्स द्वारा पेश योजना के अनुसार न्यायाधीशों को अपराधियों को दंड देने के प्रमुख कारण के रूप में "लोगों के एक विशेष समूह के खिलाफ घृणा या हिंसा" को ध्यान में रखना होगा।
समाचार पत्र 'द एज' ने मंगलवार को कहा कि पीड़ितों के साथ अपराध के नस्ल,धर्म या लिंग आधारित होने पर कड़ा दंड लागू होगा।
राज्य सरकार भारतीय छात्रों, समलैंगिकों और अन्य समूहों के खिलाफ हिंसा रोकने का प्रयास कर रही है।
चीन के छात्रों के बाद भारतीय छात्रों की संख्या आस्ट्रेलिया में सबसे अधिक है।
अखबार के अनुसार संबंधित मंत्री लंबी अवधि में 'घृणा से जुड़े अपराधों' को एक नए अपराध की श्रेणी में शामिल करने पर भी विचार कर सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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