मुंबई हमलों का सूत्रधार रिहा, भारत ने दुर्भाग्यपूर्ण कहा (लीड-3)
लाहौर उच्च न्यायालय के इस फैसले के तत्काल बाद संवाददाताओं से बातचीत में गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा, "हमें दुख है कि पाकिस्तान ने इस अपराध के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई।"
जमात-उद-दावा के प्रवक्ता ने लाहौर में संवाददाताओं को बताया कि नजरबंद सईद को रिहा कर दिया गया है। उसने कहा, "सईद आतंकवादी नहीं है और न ही जमात-उद-दावा आतंकवादी संगठन है।"
अदालत के फैसले का ब्यौरा तत्काल उपलब्ध नहीं हो सका। अभियोजन पक्ष के वकीलों ने इस फैसले पर हैरत व्यक्त करते हुए कहा है कि इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जाएगी।
इसी बीच नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने आतंकवादी संगठन लश्कर-ए तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद की रिहाई को मंगलवार को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।
सईद की रिहाई पर प्रतिक्रिया पूछे जाने पर कृष्णा से संवाददाताओं से कहा, "पाकिस्तान का यह कदम बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।"
उन्होंने कहा कि इस कदम से 26 नवंबर के मुंबई हमलों के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के प्रति पाकिस्तान की गंभीरता संदिग्ध हो गई है।
लाहौर उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ ने सईद की हिरासत के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। न्यायालय ने सईद के सहयोगी सेवानिवृत्त कर्नल नजीर अहमद की भी रिहाई के आदेश दिए हैं।
न्यायमूर्ति एजाज अहमद चौधरी, हसनत अहमद खान और जुब्दतुल हुसैन की पीठ ने दोनों पक्षों की जिरह सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।
सईद लश्कर-ए तैयबा का संस्थापक है। इस संगठन का मुंबई पर 26-29 नवंबर को हुए आतंकवादी हमलों में हाथ माना जाता है। भारतीय संसद पर 13 दिसंबर के आतंकवादी हमलों के बाद अंतर्राष्ट्रीय दबाव के कारण पाकिस्तान सरकार के लश्कर पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद उसने जमात-उद-दावा के रूप में काम शुरू किया।
मुंबई हमलों के सिलसिले में एकमात्र जीवित पकड़े गए आतंकवादी अजमल आमिर कसाब ने कबूल किया है कि वह पाकिस्तानी है और मुंबई हमलों के लिए उसे लश्कर ने प्रशिक्षित किया था।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा जमात-उद-दावा को आतंकवादी संगठन लश्कर-ए तैयबा का संगठन घोषित किए जाने के बाद सईद को 11 दिसंबर को हिरासत में लिया गया था। उसे शुरुआत में एक महीने के लिए हिरासत में लिया गया था। बाद में उसकी हिरासत की अवधि बढ़ती गई और पांच मई को उसकी हिरासत 60 दिन बढ़ा दी गई।
संयुक्त राष्ट्र की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान सरकार ने जमात-उद-दावा के 40 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया और देश भर में चलाए जा रहे उसके दर्जनों कार्यालयों और राहत केंद्रों को बंद कर दिया।
उधर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश की ओर से जारी बयान में कहा गया, "हाफिज सईद की रिहाई से हमें निराशा हुई है।"
सईद जमात-उद-दावा और लश्कर-ए तैयबा जैसे संगठनों का प्रमुख है जिन्हें संयुक्त राष्ट्र ने अल कायदा से संबद्ध संगठनों की सूची में डाल रखा है। इसका जिक्र करते हुए प्रकाश ने कहा कि इन संगठनों से संबद्ध होने की वजह से सईद को विशेष रूप सूची में डाला गया है। उन्होंने कहा कि यह अफसोसनाक है कि सईद के अतीत तथा अंतर्राष्ट्रीय जगत के समक्ष व्यक्त की गई प्रतिबद्धताओं के बावजूद उसे रिहा कर दिया गया।
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के इन कदमों से उस साजिश की जांच पर सवालिया निशान लग गया है जिसके तहत मुंबई आतंकवादी हमले की योजना बनाई और अमल में लाई गई। इस हमले में विदेशी नागरिकों सहित सैंकड़ों लोग मारे गए थे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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