पाक अदालत ने मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड को रिहा किया (लीड-2)

सईद के वकील ए के डोगर ने बताया कि लाहौर उच्च न्यायालय ने सईद को हिरासत में रखे जाने को संविधान और देश के कानूनों का उल्लंघन करार दिया डोगर ने कहा, "आज का फैसला यह दर्शाता है कि संप्रभुता सर्वशक्तिमान अल्लाह के हाथ है।"

नई दिल्ली में गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा, "हमें दुख है कि पाकिस्तान ने अपराध को अंजाम देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में उचित गंभीरता से काम नहीं लिया।"

जमात-उद-दावा के प्रवक्ता ने लाहौर में संवाददाताओं को बताया कि नजरबंद सईद को रिहा कर दिया गया है। उन्होंने कहा, "सईद आतंकवादी नहीं है और ना ही जमात-उद-दावा ही आतंकवादी संगठन है।"

अदालत के फैसले का ब्यौरा तत्काल उपलब्ध नहीं हो सका। अभियोजन पक्ष के वकीलों ने इस फैसले पर हैरत व्यक्त करते हुए कहा है कि इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जाएगी।

लाहौर उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ ने सईद की हिरासत के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। न्यायालय ने सईद के सहयोगी सेवानिवृत्त कर्नल नजीर अहमद की भी रिहाई के आदेश दिए हैं।

न्यायमूर्ति इजाज अहमद चौधरी, हसनत अहमद खान और जुबदतुल हुसैन की पीठ ने दोनों पक्षों की जिरह सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।

इस्लामाबाद में संवाददाताओं से बातचीत में सईद के पुत्र हाफिज ताल्हा ने जमात-उद-दावा के कार्यकर्ताओं से संयम बरतने और पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत में तालिबान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई की वजह से विस्थापित हुए लोगों के राहत और पुनर्वास पर ध्यान देने की अपील की है।

गत 30 मई को पाकिस्तान सरकार ने लाहौर उच्च न्यायालय को अल कायदा से सईद के रिश्ते होने के प्रमाण पेश किए। जियो टीवी के अनुसार अधिवक्ता लतीफ खोसा ने बंद कमरे में चली सुनवाई के दौरान अदालत को बताया, "जमात-उद-दावा का ताल्लुक अल कायदा से है। मुंबई हमलों में शामिल एक आतंकवादी का संबंध जमात-उद-दावा से है।"

सईद लश्कर-ए तैयबा का संस्थापक है। इस संगठन का मुंबई पर 26-29 नवंबर को हुए आतंकवादी हमलों में हाथ माना जाता है। भारतीय संसद पर 13 दिसंबर के आतंकवादी हमलों के बाद अंतर्राष्ट्रीय दबावों की वजह से पाकिस्तान सरकार द्वारा लश्कर पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद उसने जमात-उद-दावा के रूप में काम शुरू किया।

मुंबई हमलों के सिलसिले में एकमात्र जीवित पकड़े गए आतंकवादी अजमल आमिर कसाब ने कबूल किया है कि वह पाकिस्तानी है और मुंबई हमलों के उसे लश्कर ने प्रशिक्षित किया।

गत दिसंबर में संयुक्त राष्ट्र द्वारा लश्कर-ए तैयबा के गुट जमात-उद-दावा को आतंकवादी संगठन लश्कर-ए तैयबा का संगठन घोषित किए जाने के बाद सईद को दिसंबर में हिरासत में लिया गया था। उसे शुरुआत में एक महीने के लिए हिरासत में लिया गया था। बाद में उसकी हिरासत की अवधि बढ़ती गई और पांच मई को उसकी हिरासत 60 दिन बढ़ा दी गई।

संयुक्त राष्ट्र की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान सरकार ने जमात-उद-दावा के 40 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया और देश भर में चलाए जा रहे उसके दर्जनों कार्यालयों और राहत केंद्रों को बंद कर दिया गया।

भारत ने गत जनवरी में पाकिस्तान को मुंबई आतंकवादी हमलों के पीछे लश्कर तथा कुछ पाकिस्तानी नागरिकों का हाथ होने के संबंध में सबूत सौंपे। मुंबई पर हुए इन हमलों में 26 विदेशियों समेत 170 से ज्यादा लोग मारे गए थे।

फरवरी में पाकिस्तान ने कबूल किया कि मुंबई हमलों की कुछ साजिश उसी की धरती पर रची गई थी और उसने भारत की ओर से सौंपे गए प्रमाणों के संबंध में 30 प्रश्न भी सौंपे। भारत ने इसका जवाब मार्च में दिया। इसके बाद पाकिस्तान ने एक बार फिर से स्पष्टीकरण मांगा जिसका जवाब भारत ने उपलब्ध करवा दिया।

इससे पहले दिसंबर 2008 में भी पाकिस्तानी प्रशाासन ने लश्कर के कमांडर जकीउर रहमान लखवी को गिरफ्तार किया था। भारत ने लखवी और मुंबई हमलावरों के बीच टेलीफोन पर हुए संवाद संबंधी सबूत सौंपे थे। यह सबूत एफबीआई ने मुहैया कराए थे।

लखवी के चार साथियों-जरार शाह, अबु अल-कामा, हमद आमिन सादिक और शाहिद जमील रियाज को भी बंदी बनाया गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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